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साहिबा की यादें 2 by Rihaan

SongGPT
साहिबा की यादें 2 by Rihaan - Hindi Indie Lo-Fi music cover art

साहिबा की यादें 2

Hindi Indie Lo-Fi

0:003:00
Lyrics
Description
साहिबा, लौट के आ, तेरे बिना कुछ भी ना बाकी है
चाय ठंडी, खिड़की पे बारिश, तेरी यादों की वो बारिश है
तेरी हँसी की वो चलती हवा, मन को बहा ले जाती है
रात के सन्नाटे में तेरी आवाज़, दिल को छू जाती है
तेरे बिना ये पल थम जाते हैं
तू जहाँ है, वहाँ मेरी रात जागती है
साहिबा, तेरी यादें मेरे अंधेरों में बसी हैं
दिन के उजालों में भी तेरी परछाइयाँ चली हैं
तेरा ही ख्याल, मेरे दिल की दूरी मिटाए बिना
साहिबा, ये वक्त भी तुझसे ही रोता है
साहिबा, ये वक्त भी तुझसे ही रोता है
साहिबा, तेरा नाम लबों पे, पर तू ना सामने है
जैसे कोई ख़्वाब टूटे, जो अब तक अधूरा रहे
तेरी बातों में खोया, तेरे झूठे वादों का रंग लगा
आँखों में तेरी जो छुपी हुई है, वो तसवीर किस कसमें जगा
तेरे बिना ये पल थम जाते हैं
तू जहाँ है, वहाँ मेरी रात जागती है
साहिबा, तेरी यादें मेरे अंधेरों में बसी हैं
दिन के उजालों में भी तेरी परछाइयाँ चली हैं
तेरा ही ख्याल, मेरे दिल की दूरी मिटाए बिना
साहिबा, ये वक्त भी तुझसे ही रोता है
साहिबा, ये वक्त भी तुझसे ही रोता है
छुप-छुप के देखता हूँ तुझे इन गलियों में कहीं
तू ना हो सामने, फिर भी तेरी खुशबू संग है
कभी तो चल, रूबरू हो, ना रहे तेरी आवाज़ दबा
इन हवाओं में तेरा नशा गहरा, मेरी रूह पिघला
साहिबा, तेरी यादें मेरे अंधेरों में बसी हैं
दिन के उजालों में भी तेरी परछाइयाँ चली हैं
तेरा ही ख्याल, मेरे दिल की दूरी मिटाए बिना
साहिबा, ये वक्त भी तुझसे ही रोता है
साहिबा, ये वक्त भी तुझसे ही रोता है
ठहरी हुई सांसों में तेरा नाम गूंजता है
तेरे बिना हर शाम यूँ उदासी छूती है
साहिबा, मेरा दिल तेरे ही लिए धड़कता है
चले ना तू, फिर भी तेरे साथ चलता है