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सफर की धुन 1 by Khushi

SongGPT
सफर की धुन 1 by Khushi - Indie,male vocals music cover art

सफर की धुन 1

Indie,male vocals

0:003:13
Lyrics
Description
(verse)
नमस्कार दोस्तों! मैं हूं आपका दोस्त मंकी भाई,
आज कानपुर से निकल चुका हूं, चित्रकूट की राह पर आया।
देखो ये पीछे इंटरसिटी एक्सप्रेस है,
मज़ा आ रहा है यार सफर में, दिल में खुशी का सागर है।
(chorus)
हरियाली के खेत, मन को भाते,
सफर की धुन में, हम सबको लुभाते।
भरतकूप की ओर, बढ़ते जा रहे,
जुड़े रहिए मेरे साथ, नए रंगों में खो जाएं।
(verse)
ट्रेन की खिड़की से बाहर देखता,
खेतों की हरियाली, मन को भाता।
अब थोड़ी ही देर में भरतकूप पहुंचने वाले हैं,
इस सफर की कहानी, सबको सुनाने वाले हैं।
(chorus)
हरियाली के खेत, मन को भाते,
सफर की धुन में, हम सबको लुभाते।
भरतकूप की ओर, बढ़ते जा रहे,
जुड़े रहिए मेरे साथ, नए रंगों में खो जाएं।
(pre-chorus)
सफर का ये मज़ा, कभी न भूलेंगे,
दोस्तों के संग, यादें बनाते चलेंगे।
(chorus)
हरियाली के खेत, मन को भाते,
सफर की धुन में, हम सबको लुभाते।
भरतकूप की ओर, बढ़ते जा रहे,
जुड़े रहिए मेरे साथ, नए रंगों में खो जाएं.