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सपनों की पुकार 2 by Gayanender

SongGPT
सपनों की पुकार 2 by Gayanender - Indian,Male vocals music cover art

सपनों की पुकार 2

Indian,Male vocals

0:003:57
Lyrics
Description
(इंट्रो - मधुर सितार और तबला की धुन)
(कोरस)
सुनो नायब जी, दिल की ये आवाज़,
छुपे हैं जज़्बात, छुपा नहीं कोई राज़।
छह हज़ार में घर चलाना, ये कैसा फ़साना,
हम भी हैं गाँव के वो सपने, जो चाहते हैं आसमां।
(अंतरा 1)
दिन की पहली किरण से, हम कर दें काम शुरू,
टास्क जो मिला पोर्टल पर, करें दिल से पूरा।
हर रिकॉर्ड में छुपी है कहानी हमारी मेहनत की,
पर 9 से 5 की बंदिश में, क्यों खो जाए ये बात कहीं?
(प्रीकोरस)
ना सिर्फ़ नौकरी, ये हमारी पहचान है,
गाँव के हर कोने में, हमसे जुड़ी जान है।
इंसाफ़ की जो है आस, वो आज भी बाकी है,
न्याय की राह में, दिल से हम जागे हैं।
(कोरस)
सुनो नायब जी, दिल की ये आवाज़,
छुपे हैं जज़्बात, छुपा नहीं कोई राज़।
छह हज़ार में घर चलाना, ये कैसा फ़साना,
हम भी हैं गाँव के वो सपने, जो चाहते हैं आसमां।
(अंतरा 2 - रोमांटिक टच, हल्की मृदंग और हारमोनियम)
सपनों में है तस्वीर, गाँव की खुशहाली की,
जैसे फूलों में महक, जैसे बहारों की चाल।
CPLO की मेहनत से, हर योजना खिल उठी है,
पर जब वक़्त की बात आई, तो ये बेवफ़ाई भी बड़ी है।
(ब्रिज - भावनात्मक, धीमी और सशक्त)
हम जो थामे हैं कल के सपने,
उनमें है हर दिल की धड़कन।
समझो हमारी ये पुकार,
न्याय हो, हो सम्मान।
(कोरस)
सुनो नायब जी, दिल की ये आवाज़,
छुपे हैं जज़्बात, छुपा नहीं कोई राज़।
पच्चीस हज़ार का हक़ हमारा, वो भी दिलवा दो ना,
हम भी हैं गाँव के वो सपने, जो चाहते हैं आसमां।
(आउट्रो - उत्सा