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रूह की उड़ान (Ruh Ki Udaan) 2 by Vikash

SongGPT
रूह की उड़ान (Ruh Ki Udaan) 2 by Vikash - Indian, Folk, Punjabi, Ballad,Neutral Vocals music cover art

रूह की उड़ान (Ruh Ki Udaan) 2

Indian, Folk, Punjabi, Ballad,Neutral Vocals

0:003:28
Lyrics
Description
(Verse 1)
खोया था मैं उस वीराने में, जहाँ सन्नाटा था गहरा,
टूटा मन मेरा जैसे पतझड़ की पत्तियाँ बहकतीं हवा में।
पर मिट्टी की खुशबू में छुपा था वो जज़्बा, वो आग,
जिसने फिर जगाया मुझे, मेरी रूह को दी नई राह।
(Pre-Chorus)
पलकों के पीछे छुपी थमी हुई दास्तां,
जैसे हवा के संग उड़ता कोई जहान।
टूटे सपनों की सूरत में छुपा था जहाँ,
मैंने पाया खुद को, अपनी पहचान।
(Chorus)
चलो उड़ान भरें, अपनी रूह की राहों में,
दिल के हर जख्म को छू लें, प्यार की बातों में।
पंजाबी ठाठ में, हरियाणवी रंगों से,
बुनें हम अपनी कहानी, जो रहे अमर संगों में।
(Verse 2)
आँखों की उस झील में, जो कभी थी धुंधली,
अब चमकती है चाँदनी, हर दर्द है धुंधला।
सफर ये नया है, पर पुरानी यादों की छाँव में,
मैंने सीखा है जीना, अपनी धड़कनों के जादू में।
(Bridge)
कभी तोड़े थे हजारों लम्हे, कभी जोड़े थे टूटे तार,
अब बन गया है संगीत मेरा, जैसे दिल की कोई पुकार।
आर्टिफिशियल नहीं ये एहसास, ये है मेरी आत्मा की आवाज़,
टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी, मैं हूँ अपनी पहचान का राज़।
(Chorus)
चलो उड़ान भरें, अपनी रूह की राहों में,
दिल के हर जख्म को छू लें, प्यार की बातों में।
पंजाबी ठाठ में, हरियाणवी रंगों से,
बुनें हम अपनी कहानी, जो रहे अमर संगों में।
(Outro)
अब नहीं कोई डर, न कोई फासला,
मैं हूँ वो गीत जो गाए हर जज़्बा।
रूह की उड़ान में, खो जाऊँ मैं,
नई दुनिया, नई आशा बनाऊँ मैं।