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रंगीन चलन 2 by taiyab

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रंगीन चलन 2 by taiyab - क्लासिक music cover art

रंगीन चलन 2

क्लासिक

0:002:50
Lyrics
Description
नये को नये से मिलाने का चलन देखा है,
चमकते सितारों से सजा ये गगन देखा है।
हर शख़्स यहाँ अपने ही रंग में खोया है,
हमने मेले में भी तन्हा सा मन देखा है।
कब, कहां और कैसे मिलना है अदब से,
नजाकत से होते चार, नयन देखा है।
रंगीन चलन ये ज़िंदगी का, कभी हँसती, कभी रोती राह,
धूप-छाँव की छाँव में छुपा, हर इक फ़साना जो साथ लाया।
रंगीन चलन ये ज़िंदगी का, चलते जाना इस सफर में हम,
बदलती चाहतों के सागर में, ऊपर-नीचे जैसे लहरें लाया।
कभी धूप में जलना, कभी छांव में ठहरना,
जिंदगी का यही रंगीन चलन देखा है।
जो गिरा है वही उठकर आगे बढ़ा है अक्सर,
हमने ठोकर में भी इंसां का जतन देखा है।
रंगीन चलन ये ज़िंदगी का, कभी हँसती, कभी रोती राह,
धूप-छाँव की छाँव में छुपा, हर इक फ़साना जो साथ लाया।
रंगीन चलन ये ज़िंदगी का, चलते जाना इस सफर में हम,
बदलती चाहतों के सागर में, ऊपर-नीचे जैसे लहरें लाया।
कभी फूलों की तरह खिलता था रिश्ता अपना,
अब उसी शाख पे बिखरता हुआ चमन देखा है।
वक़्त की हवा आई, ले गई उन कहानी को,
फिर भी दिल में कहीं, मुस्कान बची बनी देखी है।
रंगीन चलन ये ज़िंदगी का, कभी हँसती, कभी रोती राह,
धूप-छाँव की छाँव में छुपा, हर इक फ़साना जो साथ लाया।
रंगीन चलन ये ज़िंदगी का, चलते जाना इस सफर में हम,
बदलती चाहतों के सागर में, ऊपर-नीचे जैसे लहरें लाया।
अपनी किस्मत पर नाज़ क्यों न करे 'तैयब',
जब तुझमें ही रहबर, मुकद्दर, सनम देखा है।