या अल्लाह की रहमत by Reshma

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या अल्लाह की रहमत by Reshma - Arabic Style Na'At music cover art

या अल्लाह की रहमत

Reshma

Arabic Style Na'At

0:003:44
Lyrics
Description
जब अन्धेरों ने घेरा था, वक्त भी थमसा गया,
तेरे नाम का सूरज हर सिम्त चमकता गया, ना तलवार से ना ताकत से दिल जीते तूने, एक रह्मत से दुनियां के रस्ते बदले तूने, जहां नफरत की आंधी थी, वहां करम बहा दिया, सुखी रूहों की जमीं पर नूर तुने सजा दिया।
या अल्लाँ, तेरी रह्मत ने जग को थोड़ी रोशनी दी, हर तूटे दिल को नई उम्मीद की बूं बरसाई, या अल्लाँ, तेरे नाम से मुसाफिर भी रापा गया, जो खाली था, वही अब तेरे नूर से भर गया।
थूप में पसीना बहता था जब हर धकन थी बाती, तेरी दूआ की लोरी ने दिल को सुकून जताई, मगर मच की निगाहों में भी अब आशा खिल उठी, तेरी रह्मत ने हर गम की दिवारें तोड़ी,
ना तलवार से ना ताकत से दिल जीते तूने, एक रह्मत से दुनियां के रस्ते बदले तूने, जहां नफरत की आंधी थी वहाँ करम बहा दिया, सूखी रूहों की जमीपर नूर तुने सजा दिया,
या अल्लाँ तेरी रह्मत ने जग को थोड़ी रोशनी दी, हर तूटे दिल को नई उमीद की बूं बरसाई, या अल्लाँ तेरे नाम से मुसाफिर भी रह पा गया, जो खाली था वही अब तेरे नूर से भर गया,
आज भी जब कोई तूटा तेरे दर पे आ जाता है, खाली जोली वाला भी यहां भर के ही जाता है, ना ये जीत किसी मुलक की, ना हार किसी इंसान की, ये तूफट है रह्मत की, तेरे ही एहसान की,
या अल्ला, तेरी रह्मत ने जग को थोड़ी रोशनी दी, हर तूटे दिल को नई उमीद की बूं बरसाई, या अल्ला, तेरे नाम से मुसाफिर भी रह पा गया, जो खाली था वही अब तेरे नूर से भर गया,
या अल्ला का जो नूर दिल में उतर जाता है, वही बंदा हर मुश्किल में सर उंचा उठाता है,