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मोर छत्तीसगढ़ माटी के गीत 2 by alluarjun

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मोर छत्तीसगढ़ माटी के गीत 2 by alluarjun - छत्तीसगढ़ी लोकगीत music cover art

मोर छत्तीसगढ़ माटी के गीत 2

छत्तीसगढ़ी लोकगीत

0:002:37
Lyrics
Description

[Verse 1] धूप तने छांव के खेला, अरपा के धार संग, मोर छत्तीसगढ़ के मन मा, बहे मया के रंग। धान के हराभरा खेत म, काम करे दिन-रात, बस्तर के जंगल म गूंजे, माटी के पहचान बात। [Pre-Chorus] बाट चलथे जेन सुघ्घर सपना संगे, सुन मोर गीत के हर एक पंक्ती। [Chorus] मोर छत्तीसगढ़, मोर अभिमान, नदी धरती अउ अमर जान। धान के कटोरा, सबके पहचान, जय जोहार गूंजे, बढ़े सम्मान। [Verse 2] कांगेर घाटी ले लेकर, रायपुर के बाजार, हर गली-मोहल्ला मा, सुनय माटी के प्यार। सुआ अउ पंथी के ठेठ राग, सुग्घर बोल मिलाथें, एकता के रंग म रंगे, सब्बो मन बीलाथें। [Pre-Chorus] सपना के डुलरी तैरत चाल, फूल झरे बिहनिया के हाल। [Chorus] मोर छत्तीसगढ़, मोर अभिमान, नदी धरती अउ अमर जान। धान के कटोरा, सबके पहचान, जय जोहार गूंजे, बढ़े सम्मान। [Bridge] खेत के मिट्टी ला जोड़े रथे दिल, माटी के खुशबू म बंधे हे सिलसिला। गाँव के चउरा अउ बरसात के पानी, बने हे हमर कर्मभूमि, हमर कहानी। [Chorus] मोर छत्तीसगढ़, मोर अभिमान, नदी धरती अउ अमर जान। धान के कटोरा, सबके पहचान, जय जोहार गूंजे, बढ़े सम्मान। [Outro] जय जोहार! जय छत्तीसगढ़ के माटी, रहे हमेशा अमर हमर बाती। मोर छत्तीसगढ़, मोर शान, माटी के गंध म समाय हे जान।