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मन की लहरें 2 by Vikash

SongGPT
मन की लहरें 2 by Vikash - Indie Pop,Male vocals music cover art

मन की लहरें 2

Indie Pop,Male vocals

0:003:09
Lyrics
Description
(Verse 1)
पल में यहाँ, पल में वहाँ, मन मेरा भागता है
सौ ख़यालों की गलियों में, दिन-रात जागता है
चीज़ें खो जाती हैं, बातें भूल जाता हूँ
एक धुन पकड़ता हूँ, फिर नयी धुन में खो जाता हूँ
(Chorus)
ये मन की लहरें हैं, रोकूँ कैसे?
इनपे तैरना सीख लिया है मैंने वैसे
थोड़ी ऊँची-नीची, थोड़ी बहकी-बहकी
इन्हीं लहरों में है, मेरी दुनिया महकी-महकी
(Verse 2)
लोग कहते हैं, "ध्यान दो, एक जगह टिक जाओ"
पर मन की पतंग को, कैसे कोई समझाए, बताओ?
कभी रंगों में खोया, कभी शब्दों में डूबा
हर पल में छुपा है, एक नया ही अजूबा
(Chorus)
ये मन की लहरें हैं, रोकूँ कैसे?
इनपे तैरना सीख लिया है मैंने वैसे
थोड़ी ऊँची-नीची, थोड़ी बहकी-बहकी
इन्हीं लहरों में है, मेरी दुनिया महकी-महकी
(Bridge)
हाँ माना थोड़ी उलझन है, थोड़ी सी बेचैनी है
पर इसी उलझन में, एक अनोखी रौशनी है
जब दुनिया एक रस्ते चलती है, मेरे सौ रास्ते हैं
मेरी यही कमज़ोरी, मेरी ताक़त बनते हैं
(Chorus)
ये मन की लहरें हैं, रोकूँ कैसे?
इनपे तैरना सीख लिया है मैंने वैसे
थोड़ी ऊँची-नीची, थोड़ी बहकी-बहकी
इन्हीं लहरों में है, मेरी दुनिया महकी-महकी