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न्याय का धंधा 1 by C.M.

SongGPT
न्याय का धंधा 1 by C.M. - Hindi Rap,both vocals music cover art

न्याय का धंधा 1

Hindi Rap,both vocals

0:001:54
Lyrics
Description
न्याय का धंधा
कैसी ये माया, कैसी ये नगरी,
जहाँ न्याय भी बिकता है, जैसे कोई बकरी।
अदालत में कुर्सी पर बैठा है जो जज,
उसकी कलम भी चलती है, जैसे कोई गज।
फाइलों का अंबार, तारीख पे तारीख,
गरीब बेचारा पीसे, अमीर करे तारीफ।
वकील बाबू बोले, "फीस बढ़ाओ थोड़ी,"
न्याय मिलेगा तुमको, चाहे लगे हथौड़ी।
सच तो यहाँ बस, किताबों में सोया है,
झूठ की दुकान यहाँ, हर गली में बोया है।
पैसा फेंको तुम, बदले में पाओ इंसाफ,
गरबों की सुनवाई, यहाँ अक्सर है माफ़।
कानून की देवी भी, आँख पर पट्टी बाँधे,
शायद इसीलिए वो, सच से रहती है नांदे।
काला कोट, सफेद झूठ, ये ही है पहचान,
न्याय का धंधा यहाँ, खुल्लम खुल्ला है महान।
गरीबों की आहें, दीवारों में गुम हो जाती हैं,
अमीरों की बातें, पल भर में सुन ली जाती हैं।
कैसा ये अंधेर, कैसी ये सरकार,
जहाँ न्याय के नाम पर, होता है व्यापार।