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द्रौपदी की दास्तान 2 by Kumari

SongGPT
द्रौपदी की दास्तान 2 by Kumari - Indian Fusion music cover art

द्रौपदी की दास्तान 2

Indian Fusion

0:003:31
Lyrics
Description
बात वर्षो पुरानी हो या नई
एक नारी के चित्रण का ये न केवल एक अवलोकन है
मानता हू मै की युग अलग थे
परंतु दोनो के जीवन में दोहन थे
एक भूमि से उत्पन्न हुई, तो एक यज्ञसेनी थी
एक सतयुग की सिय, तो एक द्वापर की द्रोपदी थी
फिर कल्पना से आतुर मैने दोनो को समकाल किया
देख एक सी पीड़ा दोनो का संवाद किया
कहा जनकतन्या ने: युग बीतते देखा मैने
पर अपना हाल नही
उस रोज रावण था
और आज दुर्योधन को भी भान नही
इतने में कह उठी पांचाली: (जैसे धधकी हो उसके मन में एक चिंगारी)
न उस पल मैं निर्बल थी,
न ही तुम्हारा कोई दोष प्रिय
लक्ष्मण रेखा तुमने लांगी,
और मुझे किया था निर्वस्त्र सिये,
वो भूल गए थे शायद
अगर नारी जननी है
तो संघारक भी
अगर नारी सती है
तो काली भी
हर युग में उन्होंने हमारा अपमान किया
हम सहते रहे, सोचा कल सब ठीक होगा
पर कठपुतली समझ उन्होंने
हमारे साथ बहुत दुर्व्यवहार किया
कहती है मां जानकी फिर: क्रोध तुम्हारा उचित द्रोपदी
पर किसको उसका एहसास सखी
मैने तो तिनके से लाज बचाई
तुम्हे तो केवल गोविंद की आस लगी
उस पल उस वन में मैं अकेली थी
पर थी सभा मोन जब घटी वह अनहोनी थी
ऐसे ही चलता रहा संवाद दो कुलो का
नारी कभी अबला न थी और यही संघर्ष था दोनो का
पर एक बात जन को बतला