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दीवारों से बात 1 by Play

SongGPT
दीवारों से बात 1 by Play - Hindi Emotional Ballad,Female Vocals music cover art

दीवारों से बात 1

Hindi Emotional Ballad,Female Vocals

0:003:24
Lyrics
Description
(Verse 1)
मेरे घर की ये दीवारें, अब मेरी दुनिया बन चुकी हैं,
हज़ार ख्वाहिशें थी मेरी, जो सब अब मर चुकी हैं।
माँ दुआ करती है हर भगवान से कि उसकी हंसती हुई बेटी उसे वापस मिल जाए,
पर समय का ये पहिया पीछे नहीं मुड़ता, चाहे कोई कितनी भी मिन्नतें कर आए।
(Chorus)
सब कहते हैं "मैं ठीक हूँ", पर मैं मौत और ज़िंदगी के बीच खड़ी हूँ,
ज़िम्मेदारियों के बोझ तले, मैं खुद अपनी नज़रों में बड़ी हुई हूँ।
चाहती हूँ कोई ऐसा हो, जो बिना बोले मेरी खामोशी पढ़ ले,
पहाड़ों में एक छोटा सा घर हो, और कोई बस मेरा हाथ थाम कर चले।
(Verse 2)
आजकल के लोग अपनों को छोड़, गैरों के आगे सिर झुकाते हैं,
पर मैंने बचपन में ही समझ लिया था, माँ-बाप के सिवा सब रिश्ते टूट जाते हैं।
जो प्यार मैं औरों में बांट रही थी, वो बस मुझे ज़ख्म दे रहे थे,
खुद को देखो, ऐसे लोगों के लिए मैं अपनी ज़िंदगी हार रही थी।
(Chorus)
सब कहते हैं "मैं ठीक हूँ", पर मैं मौत और ज़िंदगी के बीच खड़ी हूँ,
ज़िम्मेदारियों के बोझ तले, मैं खुद अपनी नज़रों में बड़ी हुई हूँ।
चाहती हूँ कोई ऐसा हो, जो बिना बोले मेरी खामोशी पढ़ ले,
पहाड़ों में एक छोटा सा घर हो, और कोई बस मेरा हाथ थाम कर चले।
(Bridge)
मुझे ये दिखावे की शोहरत रास नहीं आती,
दिल में बहुत कुछ है, पर ज़ुबां पे बात नहीं आती।
लोग कहते हैं मेरी आदतें खराब हो गई हैं, मैं बदल गई हूँ,
पर उन्हें क्या पता, मैं किन हालातों से गुज़र कर यहाँ तक आई हूँ।
(Outro)
मैं कायर नही