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कृष्ण की लीला 1 by Rishab

SongGPT
कृष्ण की लीला 1 by Rishab - Indian music cover art

कृष्ण की लीला 1

Indian

0:003:41
Lyrics
Description
गर्भार नगरी, क्रुणा उठ्येन, सत्य के सिंहासन पर, बैठे मधुसूदन, साधु के रक्षक, दुष्ट के रक्षक, दुष्ट के संग रास रचाए, मुरली की मधुर प्रीत सुनाए।
देटी में पूल कुछे, पूयले याई पूले सचते।
बन की एन हर है, हर में तही नर तर है, नाता के सुनावे गुम सोमी जर के नूल है।
बन की एन हर है, हर में तही नर तर है, नाता के सुनावे गुम सोमी जर के नूल है।
पार की नच में हर, नियानों में रख खे, अर्मी ने आता ने, बला आसी में।
पार की एन हर है, हर में तही नर तर है, नाता के सुनावे गुम सोमी जर के नूल है।
पार की एन हर है, हर में तही नर तर है, नाता के सुनावे गुम सोमी जर के नूल है।
निकुंब तुआ दोलचू कावे तेना नहीं, अर्संद गाईश कर काम घुलक नहीं।
रदा पल गावा रपना इता, घरो मना में एतू में पुलीशते।
शासुबा तुम भी लेनों भी पुलक हो, पार भी में वोरों वाविल बड़काई।
साप की आर्मां भदलस कर काम, ताई का गुर्म्यां शोंप हाते गां।
मैं रुहाक है, बाल क्यों आणा है, हर में तेही नावतर है।
राता के सुरा में गुम्सो मी चरके रूरू है, लबार की नाच में है।
राता के सुरा में गुम्सो मी चरके रूरू है, लबार की नावतर है।