कमकाल, लकड़बग्गा और सूर्रा का हंगामा 2 by Reshma

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कमकाल, लकड़बग्गा और सूर्रा का हंगामा 2 by Reshma - Indian Folk Fusion music cover art

कमकाल, लकड़बग्गा और सूर्रा का हंगामा 2

Reshma

Indian Folk Fusion

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Lyrics
Description
सुबह की पहली किरण सुनाए कहानी ये रात की, कमकाल, लकड़बग्गा, सुर्रा की दोस्ती की बात की।
रात गहरे, पर जंगल कही सुना, सुना, चीप चीप के चलती परच्छाई, आज कुछ नया कहे, सूर्रा ने धून बताई, जैसे हवा में गीत, कमकाल ने मुस्कुरा के पूछा, क्या ये ससर कोई जीत।
हमागाल, कमकाल, जैसे चांद की धया चले साख, गड़बगगाल, गड़बगाल, उम्मीद की किर्मबल जल के रात, सुर्रा, सुर्रा, तीनों मिलके मचाए हंगा माज।
बेदों की झाओं में चमकी कुछ अनकही बाते, लेकर बगगाने कहाँ गे बड़े, खामोशी तूते, सुर्रा ने साजी सरकाया, तल पर नहरें जेली, कमकाल बोला बड़ नहीं।
साक है हम सब की तोली, कमकाल तमकाल, जैसे चांद की छाया चले साथ, करबगदा न तनपकाल, उम्मीद की किर्मबल जल के रात, सुर्रा, सुर्रा, तीनों मिलके मचाए हंगा माज।
सितारे से चमका, जो दिलों का कारबान आदान, ससर में लिए जो दोस्ती जहाँ, कमकाल के शब्दों में छुपा है जो जुनूं, लिवरवगा के हासीले, किला है सावन का जुनूं, सुरा के सुरों से बजी ये जग की थूँ।
कमकाल, कमकाल, जैसे चाद की छाया चले साथ, बगडबगदाल करबगाल, ममीद की किरमल जल पे राथ, सिर्रा, सिर्रा, तीनों मिलके मचाए हंगा माज।
सुबह की बली किरें सोनाए कहानी ये राथ की, कमकाल करबगदाल सुरा की दोस्ती की बात की, हर दिशा में गूजे उनका नामार, उनके खुं जंगल के दिल में जुपा ये दोस्ती का जुनूं।
सुबह की बली किरें सोनाए कहानी ये राथ की, कमकाल करबदाल सुरा की, कमकाल करबदाल सुरा की, हर दिशा में गूजे उनका नामार, उनके खुं जंगल के दिल में जून।
सुबह की बली किरें सोनाए कहानी ये राथ की, कमकाल करबदाल सुरा की, कमकाल करबदाल सुरा की, हर दिशा में गूजे उनका नामार, उनके खुं जंगल के दिल में जून।