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इंसाफ़ की पुकार 1 by Ankush

SongGPT
इंसाफ़ की पुकार 1 by Ankush - Hip Hop,male vocals music cover art

इंसाफ़ की पुकार 1

Hip Hop,male vocals

0:003:17
Lyrics
Description
(Verse 1)
सुनो ज़रा ध्यान से, ये कोई गाना नहीं है,
ये वो चीख है जो इंसाफ़ तक पहुँचना नहीं है।
हरदोई की धरती से उठी है पुकार,
दरिंदों के ख़िलाफ़ ये जंग है इस बार।
(Verse 2)
सहेली के नाम पे रची गई थी साज़िश,
भरोसे का खून, इंसानियत पे वार क़ाबिल-ए-लानत।
वीडियो बनाकर किया गया ब्लैकमेल,
कानून की किताब में क्यों है अब तक फेल?
(Chorus)
ये चीख है, दर्द है, इंसाफ़ की माँग है,
हर आवाज़ में गूँज रही एक ही तान है।
बेटियाँ किसी की भी हो, इज़्ज़त सबकी एक है,
दरिंदों का अंजाम बस सज़ा-ए-फांसी नेक है।
(Verse 3)
मजहब के नाम पे बाँटने की कोशिश है,
पर सच्चाई यही कि गुनाह की कोई जात नहीं होती है।
ना हिंदू, ना मुसलमान, ना कोई और पैग़ाम,
दरिंदा दरिंदा है — बस जानवर का नाम।
(Bridge)
सोचो उस बाप का, जिसकी बेटी लुट गई,
सोचो उस माँ का, जिसकी आँखें फूट गईं।
सोचो उस भाई का, जो राखी को तरसा,
हर रिश्ते का वजूद वहीं पे तो मरसा।
(Chorus)
ये चीख है, दर्द है, इंसाफ़ की माँग है,
हर आवाज़ में गूँज रही एक ही तान है।
बेटियाँ किसी की भी हो, इज़्ज़त सबकी एक है,
दरिंदों का अंजाम बस सज़ा-ए-फांसी नेक है।
(Verse 4)
नेता दे रहे भाषण, बस वोट की राजनीति,
मीडिया की सुर्ख़ियों में आधी है सच्चाई छुपी।
पर सड़कों पे जनता अब आवाज़ उठाएगी,
हर गुनहगार को चौराहे पे लटकाएगी।
(Outro)
ये रैप नहीं — ये इंकलाब का पैग़ाम है,
हर इंसाफ़ के लिए उठी हुई आवाज़ है।
बेटियाँ देवी हैं, सिर्फ़ किताबों में नहीं,
उनकी