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आख़िरी बार 2 by Imran

SongGPT
आख़िरी बार 2 by Imran - pop,male vocals music cover art

आख़िरी बार 2

pop,male vocals

0:003:53
Lyrics
Description
[Intro – Soft guitar/piano instrumental]
चुपचाप सी रातें हैं,
तेरी खामोशी की बातें हैं...
[Verse 1]
तेरे जाने की वजह पूछी थी दिल ने,
खुद ही रो पड़ा, जवाब न था।
तेरे बिना जो साँसें चलती हैं,
लगता है जैसे सज़ा हर लम्हा।
तेरे बिना जो चाँद भी निकले,
कितना सूना सा लगता है।
जो तुझसे रोशन था कल तक,
आज वो अंधेरा सा लगता है।
[Chorus – Emotional Hook]
आ आख़िरी बार मिल ले मुझसे,
फिर मैं कुछ भी नहीं कहूँगा।
तेरे पीछे जो टूटा हूँ मैं,
वो तू देखेगी, पर सुनूँगा नहीं।
तेरी खुशबू अब भी बाकी है,
मेरे कमरे की हर दीवार में।
तू भुला पाई अगर, तो बता,
मैं अब भी हूँ तेरे इंतज़ार में。
[Verse 2]
तेरे नाम की जो चुप्पी है,
वो सबसे ऊँची चीख लगी।
तेरे बिना जो हँसी आती है,
वो भी कुछ अधूरी सी लगी।
तेरा जाना आसान न था,
पर तेरा रह जाना भी मुश्किल था।
अब तन्हा रह कर समझा है,
तू मेरा हिस्सा, पर हल नहीं था。
[Bridge – Broken voice / Whispered tone]
कभी लौटे तो मत पूछना,
क्यों अधूरा हूँ अब तक।
तू ही पूरी थी शायद,
या फिर मैं ही गलत था हर वक़्त。
[Chorus – Repeat with more emotion]
आ आख़िरी बार मिल ले मुझसे,
फिर मैं कुछ भी नहीं कहूँगा।
तेरे पीछे जो टूटा हूँ मैं,
वो तू देखेगी, पर सुनूँगा नहीं。
तेरी खुशबू अब भी बाकी है,
मेरे कमरे की हर दीवार में।
तू भुला पाई अगर, तो बता,
मैं अब भी हूँ तेरे इंतज़ार में。
[Verse 3 – Calm, fading into pain]
अब जो भी आता है ख्वाबों में,
तेरा ही अक्स बना लाता है।
तेरी बातों की वो गहराई,
अब भी नींदें चुरा ले जाती है。
तेरे नाम की जो धड़क