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आकाश की आवाज़ 2 by Pratik

SongGPT
आकाश की आवाज़ 2 by Pratik - ambient-pop music cover art

आकाश की आवाज़ 2

ambient-pop

0:003:26
Lyrics
Description
(verse)
आकाश के ऊपर
ये घाटियाँ नीली हैं।
समय गुज़र जाता है।
अब कहीं दूर चले जाओ।
अरे बाप रे।
ये ऊपर दी गई बातें हैं。
समय गुज़र जाता है।
मैं मिट्टी और बेल हूँ।
चारेटन
(verse)
मेरी छाया भी पृथ्वी की सतह पर झुकी हुई है。
क्या युद्ध ख़त्म हो गया है?
मेरी इज्जत भी चप्पल की तरह फिसल रही है。
यहां तक कि कौमार्य भी अस्थिर है。
(chorus)
आकाश के ऊपर
ये घाटियाँ नीली हैं。
समय गुज़र जाता है。
अब कहीं दूर चले जाओ。
अरे बाप रे。
ये ऊपर दी गई बातें हैं。
समय गुज़र जाता है。
मैं मिट्टी और बेल हूँ。
चारेटन
(verse)
मैं रात को एक बिल्ली का सपना देखता हूं।
मेरे अंदर के दिन
मेरे भीतर सदा-सदा के लिए, ये दिन व्यर्थ हैं。
ये रातें दुःस्वप्न जैसी हैं。
सुप्रभात एवं शुभ संध्या।
मेरी जिज्ञासा जादुई हो गयी है。
मेरे कान दूर की, मधुर, मीठी घंटियों जैसे हैं。
(chorus)
आकाश के ऊपर
ये घाटियाँ नीली हैं。
समय गुज़र जाता है。
अब कहीं दूर चले जाओ。
अरे बाप रे。
ये ऊपर दी गई बातें हैं。
कलम मेय
मैं मिट्टी और बेल हूँ।
चारेटन