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अल्वी साहब की बारात 1 by Firoz

SongGPT
अल्वी साहब की बारात 1 by Firoz - हरियाणवी music cover art

अल्वी साहब की बारात 1

हरियाणवी

0:003:39
Lyrics
Description
अगर आवेगी तो अपनी जुड़ी, तू ही मेरा घर, तू ही मेरी राह, संग तेरे कटे राहें मेरी ज़िंदगी की।
तू ही मेरा घर, तू ही मेरी जुड़ी, तू ही मेरी ज़िंदगी की।
अलवी साहब की बारात ने आगे लगा दूँ सारे में, किसी और के साथ तुझे बिया के जाने ना दूँ।
बारात आवेगी तो अलवी साहब की आवेगी, किसी और की भी आने ना दूँ।
अलवी साहब की बारात दिर गाव की हवा में भी, खुशबू बसाऊंगाऊं चाईयों पे तेरा नाम लहराऊंगा।
जो भी आए मूद दिखाने, तुझे चूराने, उनका जैसे पत्थर पे पानी पर जाबे।
अलवी साहब की बाराते चब पर फार के आई, धूर धूर तक घुझे बस यही कहाई।
तुम्हारे कदमों ती जो करें पे सारी दुनिया चुकी, चेरी खुशी से मैं सासे अपनी जुरी दिना दादी को।
तुम सेरे खरजे जैसे सरक पे बलुवा मैं आओ कदमेर से मच जाए हुआ कुफान पूरा।
इन आखों में तेरी कस्म हैं सजी तेरे बिना मैं आदा बीदा रहूंगा।
अलवी साहब ने जा मुझे उजा कर नहीं तो मर जाओंगी जिहर खा के जब आओंगा तेरे गाँ मने गम भी पैचाँ पाएगा।
अलवी साहब की बाराते चप पर भार के आई रू रू तक गुञ्जे मस यही कहाई।
तुम हीरे कदमों की चुकर पर सारी भुनिया जुकी तेरी कुशी से मैं सास अपनी जूरी बाओंगा।
बाराता बेड़ी तो अलवी साहब की आवेगे बस तेरा हाथ थाम के ही रहूंगा।
तुन ही मेरा घर, तु ही मेरी रा, सग तेरे तर तेरा है मेरी संगी की।