अन्नपूर्णा सेवा — संत रामपाल जी महाराज 2 by Aafiya

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अन्नपूर्णा सेवा — संत रामपाल जी महाराज 2 by Aafiya - Devotional Folk (Hindi),Male Vocals music cover art

अन्नपूर्णा सेवा — संत रामपाल जी महाराज 2

Devotional Folk (Hindi),Male Vocals

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Lyrics
Description
[इंट्रो]
(Moderate tempo — तबला/ढोलक, हारमोनियम, सारंगी)
धुन में हल्की घंटी, हवा में सरसों की ख़ुशबू,
कड़ाही से उठे भाप में बुनता कोई दीन-सा सूफ़ू।
[अंतरा 1]
सुबह की पहली किरन, चूल्हे पर रोटियाँ ताज़ा,
कड़ाही की भाप में घुली हल्दी की साज़ा।
हरियाणा की धूप में, सरसों और गेहूँ की राह,
मेहनतकशों के चेहरे पर बिखरे नए सुबह का चाह।
वो झोला बाँधे खड़े, हाथ में चम्मच, दिल में दुआ,
गाँव की चौपाल से उठे आवाज़ — सेवा की यह गुज़ारिश सदा।
[सेतुक — प्रीकोरस]
सैकड़ों थालियाँ, कड़ाही की ठंडी-गरम बात,
बच्चों की हँसी, बूढ़ों की आँखों में फिर जागी रात।
[कोरस]
अन्नपूर्णा सेवा — थाली हर हाथ में,
किसान-श्रमिक मुस्कुराएँ — आशा साथ में।
अन्नपूर्णा सेवा — प्यार की परछाई,
भूखे को भोजन, घर-घर में रौशनी लाई।
[अंतरा 2]
ट्रक में बेसन, आटे के बोरे जैसे वादे,
नाम काले बोर्ड पर, गाँव-गाँव के छोटे-छोटे पादे।
टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर झूले लोहे की ढाल,
तेल की चमक में चमके दाता का सरल कमाल।
गाँव के पास में ट्रैक्टर गूँजे, खेत सुनहरे बालें झूमे,
किसान की थकन मिटे, श्रमिक की थाली में उम्मीद घूमें।
[ब्रिज]
जब आँधी आई, कुएँ सूख गए और दिन भी थम गया,
रात में रोशन हुए दिए, राहत का कारवाँ सम गया।
वो बाँधता बोरा, उठाता ज़िम्मेदारी का भार,
हाथ से हाथ मिलाकर बताता कि सेवा है असली उपहार।
[वैरिएशन कोरस — अंतिम की ओर]
(नेता) अन्नपूर्णा सेवा — (सभी) थाली हर हाथ