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Whispers of Elegance 1 by Dev

SongGPT
Whispers of Elegance 1 by Dev - Indie/Ghazal,both vocals music cover art

Whispers of Elegance 1

Indie/Ghazal,both vocals

0:003:47
Lyrics
Description
मुझे तुम समझो, ज़रा देर बैठो, मिरी अनकही दास्ताँ भी सुनो,
ये जो ख़ामुशी है, ये जो उदासी, इसे तुम मिरी बेबसी भी चुनो।
बड़ा बेक़रार हूँ, मैं बेज़ार कब से, न दिन को सुकून है, न शब को अमान,
इक ऐसे भँवर में फँसा हूँ मैं यारा, जहाँ हर तरफ़ है बस इक तूफ़ान।
अकेला हूँ अपनी ही दी हुई उलझन में, ये कैसी सज़ा है कि कटती नहीं,
जो बोझिल हैं पलकें, जो ख़ाली है दामन, ये क्यों ज़िंदगी मेरी हटती नहीं?
बस इक डर सताए, कहीं फिर से मैं कुछ, न खो दूँ जो थोड़ा बचा है अभी।
ये लगता है मुझको, बहुत डर गया हूँ, न उठ पाऊँगा गर गिरा मैं कभी।
मिरी ज़िंदगी एक टूटी हुई नाव, मिरा साहिल-ए-ख़्वाब ओझल कहीं,
ये यादों के साए जो लिपटे हैं मुझसे, ये छोड़ेंगे पीछा न मुश्किल कहीं।
पुरानी वो बातें, वो गुज़रे ज़माने, जो दिल को मिरी आज भी चीरते हैं,
ये काँटे हैं ऐसे जो चुभते ही रहते, हर इक साँस के साथ फिरते हैं।
ये कैसा है सन्नाटा अंदर मिरे अब, कि आवाज़ अपनी भी सुनता नहीं हूँ,
ये ख़ालीपन ऐसा कि भरने से क़ासिद, ये क्यों मैं किसी को बताता नहीं हूँ?
बस इक आरज़ू है, मिरी बेबसी को, तुम आँखों से मेरी कभी तो पढ़ो।
ये दिल चीख़ता है, ये दिल चाहता है, मिरे हाल-ए-दिल को ज़रा तो समझो।
मैं कहना तो चाहूँ, मगर कह न पाऊँ, ये लफ़्ज़ों की ज़ंजीर कैसी पड़ी है,
मिरे होंठ सिले हैं, मिरी ज़ुबान पर भी, ये कैसी बला है जो आ के अड़ी है।
ये घुटता है दम यूँ कि सीने में दिल को, ये महसूस होत