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Uth Ja Ankit Bhai 2 by Vikash

SongGPT
Uth Ja Ankit Bhai 2 by Vikash - Hindi Pop music cover art

Uth Ja Ankit Bhai 2

Hindi Pop

0:003:00
Lyrics
Description
रात को फोन पे एक ख़ामोश सा जवाब था,
उसकी हँसी अब दूर, जुदा तफावत की रौशनी थी वहाँ।
मुसीबत से नहीं, पर झूठ से जुदा था हर बहाना,
एक फटी तस्वीर मिली, और कोने में तेरा नाम सवाँरा।
चुपके से आने वाली कॉलें, स्क्रीन पर गुम संदेश,
तारीखें टुटीं मुलाकातों की, बहाना हर रोज़ नया खेल।
दिल में सवाल, होंठों पे खामोशी — रूह में आग सी जलती,
अब खुद से कहना है — यही ख़त्म नहीं, पर आग बुझनी है अभी।
ओ अनकित भाई, क्यों टूट गया तेरा विश्वास?
वो चली गई विकाश के पास, छोड़ गई तेरा आस।
दिल जलता है, पर तू खुद को संभाल,
उठ, चल आगे — नई ज़िंदगी अपना हाल संभाल।
सुबह की चाय में अब बातें अधूरी सी मिलतीं,
रातों में छुपकर आने वाली बातें, बातें किसी और की थीं।
आपकी राखी, उसका हँसता जवाब, जन्मदिन जो उसने छोड़ा,
विकाश की बाइक के पास उसकी तस्वीरें, और हर वादा खोड़ा।
एक मैसेज खोला तो देखा — 'कल मिलते हैं' पर नाम उनका था,
तुम्हारी वफ़ा में टूटे अरमाँ, उसकी बाक़ी दुनिया में उसका पहला सा था।
छुपे हुए कॉल्स की घंटियाँ, बाक़ी सब मिटा दिए उसने,
तंदुरुस्ती से नहीं, पर बहाने से उसने दिल तोड़ दिए।
तुमने देखा, तुमने जाना — सच अब आँखों के सामने:
हर खामोशी की एक वजह थी, हर मुस्कान के पीछे परदाना।
ओ अनकित भाई, क्यों टूट गया तेरा विश्वास?
वो चली गई विकाश के पास, छोड़ गई तेरा आस।
दिल जलता है, पर तू खुद को संभाल,
उठ, चल आगे — नई ज़िंदगी अपना हाल संभाल。
बस अब तू आईने से देख, सब सच है सामने,
टूटी यादों की ज़मीन पर भी नयी सुबह के दिये बेलेंगे।
तेरी आँखों में धुंधला सा savera, पर चमक बचेगी फिर भी,
रिश्ते टूटे तो क्या, खुद की इज़्ज़त से तू न डिगे कभी।
उठ जा अनकित भाई, अपने लिए ज़िंदगी जी ले।