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Teri Rakhi Tere Jaise Khoobsurat Thi by hh h

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Teri Rakhi Tere Jaise Khoobsurat Thi by hh h - ballad music cover art

Teri Rakhi Tere Jaise Khoobsurat Thi

ballad

0:002:54
Lyrics
Description
तू चली गई उस घर… जो अब तेरा नया जहाँ है…
पर मेरी दुनिया तो आज भी तू ही है बहना…
जब भी तू राखी… बांधती थी…
कलाई नहीं… दिल से कसम खाता था मैं…
कहती थी भाईया… तू हमेशा साथ रहेगा ना…
उसके एक लाइन पे… आज भी आँसू आजाते हैं…
तेरी राखी… तेरे जैसे ही खूब सूरत थी…
तेरे हाथों से बंधी तो… तूटना कभी सीखा ही नहीं…
अब वो धागा है… लेकिन तू पास नहीं…
ये दूरी रूला देती है बेहन… हर राखी… हर साथ…
जब तू हसती थी… तो लगता था… जैसे तीज का त्योहार हो…
अब तेरे बिना राखी… सिर्फ एक तारीक बन के रह गई है…
हर बार जब फोन पे कहती है भाईया… मैं ठीक हूँ… वो जूत भी कितना सच्चा लगता है…
जो रिष्टा तेरे साथ है… वो महाबद से भी कहीं ज्यादा पाक है…
लोग इश्क की बातें करते हैं… पर मैं तुझसे जो जुड़ा हूँ… वो रूह का रिष्टा है…
तेरी राखी… तेरे जैसे ही अनमोलती… तू नहीं तो… जैसे ये त्योहार भी अधूरा है…
साल में एक दिन तेरे लिए जिंदा होता हूँ… बाकी हर दिन तुझसे दूर मरता हूँ…
तेरी राखी… अब भी कलाई पहल… पर तु… तु कहाँ है बेहन… बस दूआ है… जहां भी रहो… खुश रहो… तेरा भाई हमेशा… तेरा रहेगा…