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Sad Qawwali – Ya Hussain 2 by Bushra

SongGPT
Sad Qawwali – Ya Hussain 2 by Bushra - Qawwali,both vocals music cover art

Sad Qawwali – Ya Hussain 2

Qawwali,both vocals

0:003:35
Lyrics
Description
(verse)
1. पहला दिन
चाँद निकला तो मातम का पैग़ाम आया,
हवाओं में "या हुसैन" का सलाम आया।
ग़म-ए-शहादत की रूहें जाग उठीं,
हर दिल में एक अज़ा का मुकाम आया。
(verse)
2. दूसरा दिन
तन्हाई की चादर ने क़ाफ़िले को ढाँपा,
हर आंख में अश्क, हर रूह में कांपा।
ना पानी, ना साया, ना कोई मदद,
मगर ईमाँ चमका, ना कोई भी थामा।
(verse)
3. तीसरा दिन
तिश्नगी ने जब लबों को जला डाला,
मासूम लफ़्ज़ों ने सब्र को हिला डाला।
"पानी दो अम्मा!" ये सदाएँ उठीं,
फलक ने भी रोकर ज़मीं को भिगा डाला।
(verse)
4. चौथा दिन
शजर-ए-फ़ातिमा की हया जागी,
ज़ैनब की आँखों में अदा जागी।
हर बहन बनी हिफाज़त की मिसाल,
नज़ीर बन गईं जो न झुकी, ना भागी।
(verse)
5. पाँचवां दिन
अली अकबर निकले बाप की तरह,
जवानी में भी सब्र था सलीब की तरह।
जब लौटा वो लहू लथपथ लाश बनकर,
तब काँपा खुदा भी ताज की तरीक़ की तरह।
(verse)
6. छठा दिन
हर निगाह में था बस इम्तिहान,
हर दिल पर छाया हुआ था कर्बला का बयान।
न तीरों से, न तलवारों से डरे,
हर लम्हा बना एक नया क़ुर्बान।
(verse)
7. सातवाँ दिन
असग़र की प्यास थी ज़माने से जुदा,
एक तीर ने बुझा दी सारी दुआ।
गोद में था जन्नत का सबसे हसीं फूल,
mगर फिर भी ना कांपा हुसैन का लब, ना सदा।
(verse)
8. आठवाँ दिन
जब लश्कर-ए-बातिल बढ़ा बेख़ौफ़,
हुसैन खड़ा रहा बनके तूफ़ान का शौक़।
सहराओं में अल्लाह की आवाज़ थी,
and हर साया बन गया उसकी नज़र का जोक。
(verse)
9. नौवां दिन
रात आई तो वीरानी भी साथ आई,
हर चूल्हा बुझा, हर