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Ramzan's Shadow 1 by Bhvug

SongGPT
Ramzan's Shadow 1 by Bhvug - Spiritual music cover art

Ramzan's Shadow 1

Spiritual

0:003:13
Lyrics
Description
Ramzan था बस एक मासूम सा बच्चा,
मगर उसकी परछाई... कभी मासूम नहीं थी।
वो बोलती नहीं थी, मगर सब सुनती थी,
हर रात कुछ कहती थी… और किसी को डराती थी。
(अंतरा 1)
Ramzan जहाँ भी जाए,
sाया उसका साथ आए।
कभी दीवार पे चढ़ जाए,
kabhi अंधेरे में मुस्काए।
कहते हैं, वो परछाई नहीं थी आम,
वो करती थी किसी भूले वक़्त का काम।
जो Ramzan को देख ले एकटक,
uski नींदों में बजती थी चीख़ों की धड़क।
(कोरस)
Ramzan के पास थी एक परछाई,
जो दिन में चुप, रातों में गाए।
कोई ना समझे, कोई ना बताए,
voy साया नहीं... शायद कोई सज़ा है पुरानी।
(अंतरा 2)
खिलौनों से ज़्यादा बातें,
Ramzan उस परछाई से करे।
"तू मेरी दोस्त है?" पूछे वो रोज़,
voy बस हँस दे, पर जवाब न करे।
फिर एक रात Ramzan ग़ायब हुआ,
कमरे में बस साया रहा।
अब जब चाँद ढलता है रात में,
voy परछाई किसी और को बुलाता है बात में…
(कोरस दोहराव)
Ramzan के पास थी एक परछाई,
जो अब भी गलियों में मंडराए।
kahte हैं उसने Ramzan को खा लिया,
ab voy खुद Ramzan की शक्ल में आए।
(आउट्रो)
अगर कभी साया अपने से तेज़ भागे,
aur तेरा नाम लेकर मुस्कराए…
to समझ ले… Ramzan वापस आ गया है。
your parchai बनकर…