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Navreh Aaya 1 by Usha

SongGPT
Navreh Aaya 1 by Usha - Kashmiri Folk music cover art

Navreh Aaya 1

Kashmiri Folk

0:002:59
Lyrics
Description
(soft alaap)
बर्फ पिघली… धरती नहलायी…
फिर चुपके से मुस्कुरायी…
आई बसंत की पहली खुशबू…
नई सुबह संग लायी…
नवरेह आया… नवरेह आया…
नई बहार का संदेशा लाया…
फूलों की भीनी खुशबू
हर दिल में रंग समाया…
नवरेह मुबारक… नवरेह आया…
खुशियों से हर दिल छाया…
सब साथ कहाएँ… दिल से कहाएँ…
सबके घरों में खुशहाली आए…
बर्फ की चादर ढलती जाए,
धरती रूप निखारे…
आड़ू के गुलाबी फूलों पर
सपनों के रंग उतारे…
पर्वत गाएँ, झरने गाएँ,
नदियाँ राग सुनाएँ…
सूरज की सुनहरी किरणें
नए अरमान जगाएँ…
नवरेह आया… नवरेह आया…
नई बहार का संदेशा लाया…
फूलों की महकी खुशबू
हर आँगन दीप जलाया…
नवरेह मुबारक… नवरेह आया…
खुशियों से हर दिल छाया…
सब साथ कहाएँ… दिल से कहाएँ…
सबके घरों में खुशहाली आए…
बीते पलों को बाँध के ऐसे
बच्चे हँसते जाएँ…
झाड़ू, जूते, पुराने कपड़े,
साल पुराने साथ बँधाए…
रस्सी से सब जोड़ के बच्चे
दूर कहीं घसीट ले जाएँ…
मिट्टी के घड़े की टूटी गर्दन
डाली पर लटकाते जाएँ…
पेड़ की ऊँची शाखों संग
हर दुख पीछे छोड़ आते…
हँसते-गाते नई सुबह को
खुले दिल से अपनाते…
नवरेह आया… नवरेह आया…
नई बहार का संदेशा लाया…
आईने में नई सुबह है,
नया सवेरा मुस्काया…
नवरेह मुबारक… नवरेह आया…
खुशियों से हर दिल छाया…
सब साथ कहाएँ… दिल से कहाएँ…
सबके घरों में खुशहाली आए…
माँ के हाथों सजा है थाल,
चावल और सोने के सिक्के…
आईना, जन्त्री, कलम और फूल
भाग्य लिखें ये मिलके…
दीये की लौ भी गीत सुनाए,
मंगल सुर बिखराए…
सुख-समृद्धि की सुनहरी किरण
हर घर रोशनी लाए…
नवरेह आया… नवरेह आया…
नई बहार का संदेशा लाया…
जहाँ भी धड़कें कश्मीरी दिल
वहीं वतन बसाया…
नवरेह मुबारक… नवरेह आया…
खुशियों से हर दिल छाया…
सब साथ कहाएँ… दिल से कहाएँ…
सबके घरों में खुशहाली आए…