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Mera Yaar Bachpan Ka 2 by Your

SongGPT
Mera Yaar Bachpan Ka 2 by Your - Emotional Folk / Soft Acoustic,both vocals music cover art

Mera Yaar Bachpan Ka 2

Emotional Folk / Soft Acoustic,both vocals

0:003:45
Lyrics
Description
[Intro — Spoken Word / Sung Softly]
(Slow music, nostalgic tone)
याद है तुझे वो बचपन के दिन?
जब धूल से सजे थे हमारे चेहरे,
और ख्वाब थे मिट्टी में उगते सूरज जैसे...
[Verse 1] — बचपन की गलियाँ
हमारे गांव की छोटी गलियाँ,
जहाँ से शुरू हुई थी हमारी कहानी,
पगडंडियों पे हम दौड़ा करते थे,
जैसे दुनिया बस वहीं तक है हमारी।
पेड़ की छांव, वो झूले की डोरी,
मां की आवाज़, और हमारी शरारतें सारी।
कंचे, लकड़ी की तलवारें, और मिट्टी के किले,
हर दिन एक नया सपना, हर शाम नई हँसी।
[Verse 2] — तू और मैं, एक जैसे
तेरा चेहरा धूल से सना होता,
पर मुस्कान से भरा होता,
हम लड़ते थे छोटे-छोटे बातों पे,
फिर एक इमली बाँटते — और सब भूल जाता।
तेरी झपकी मेरे कंधे पे आ टिकती,
मेरा रोना तेरे मज़ाक से छुपता।
हम दो नहीं, एक थे — लोग कहते "जुड़वाँ लगते हैं,"
शायद आत्मा से जुड़ाव कुछ ऐसा ही होता है।
[Chorus] — मेरा यार बचपन का
मेरा यार बचपन का, अब दूर कहीं है,
पर तेरी हर बात, मेरे आज में जिंदा है।
हम साथ खेले, साथ रोए, साथ जिए,
वो हर पल अब भी मेरी रूह में जिए।
अब जब बारिश आती है,
तेरे साथ भीगना याद आता है।
अब जब धूप जलाती है,
वो छांव ढूँढता हूँ, जो तेरे साथ मिलती थी。
[Verse 3] — गांव का मेला, और हँसी के पल
गांव का मेला — तू याद है ना?
जलेबी, चूड़ी, और लकड़ी की बंदूक़ें।
हम दो रुपये में पूरी दुनिया खरीद लाते,
और फिर खो जाते उस सपने की भीड़ में।
तेरी हँसी सबसे ऊँची होती थी,
जैसे घंटी मंदिर की बजती हो दिल से।
तेरा कंधा