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Kolaveri Raag - एक शास्त्रीय पीड़ा 2 by Imp Unique

SongGPT
Kolaveri Raag - एक शास्त्रीय पीड़ा 2 by Imp Unique - Indian,Female vocals music cover art

Kolaveri Raag - एक शास्त्रीय पीड़ा 2

Indian,Female vocals

0:003:31
Lyrics
Description
(आलाप - राग यमन की मधुर शुरुआत)
(अंतरा 1)
चाँदनी रात में छुपा है दर्द पुराना,
सफेद रंग की चाँदनी, काली छाया दिल का दाना।
आँखों में गुमसुम सी नमी, मन में उठे तराना,
क्यों ये कोलेवरी, क्यों ये कोलेवरी दी, जगे है ये विरह विड़ाना।
(तल बढ़ते हुए - ताल: तीन ताल (तीन मात्रा की ताली))
(संगीतमय अंतरा 2)
दूर कहीं चाँद मुस्काए, आसमान भी है सन्नाटा,
दिल के जख्मों पे बरसती, ये तन्हाई की बरसात है।
हाथ में तबला की थाप है, सितार की तान सुनाता,
कोलेवरी की ये दास्तां, राग यमन में गाता।
(कोरस - मधुर स्वर में)
क्यों ये कोलेवरी, कोलेवरी, कोलेवरी दी?
राग यमन में घुली, ये पीड़ा की गूँज है कहीं।
क्यों ये कोलेवरी, कोलेवरी, कोलेवरी दी?
दिल के तारों को छूती, ये विरह की धुन बनी।
(मध्यम अंतरा)
हाथ में हारमोनियम, बजती है शहनाई,
पलकों पे बिठाए सपने, मन में छाई माया।
जीवन की उलझनों में, प्रेम की ये माया,
कोलेवरी की छाया, बन गई है माया।
(तालिका परिवर्तन - ८ मात्रा की ताली, तीन ताल से चौतराह ताल)
(अंतरा 3)
सप्तक की ऊँचाईयों में, बजती है शहनाई,
दिल के वीराने में, प्यार की ये परछाई।
कोलेवरी के सुरों में, बंधा मेरा जहान,
राग यमन की छाँव में, खो गया मेरा अरमान।
(कोरस)
क्यों ये कोलेवरी, कोलेवरी, कोलेवरी दी?
मन के राग में बसी, ये विरह की तान है अभी।
क्यों ये कोलेवरी, कोलेवरी, कोलेवरी दी?
राग यमन की छाया में, ये प्यार की कहानी।
(अंत - धीमे स्वर में)
शांत स