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Khamoshi Ka Shor 1 by BSEB

SongGPT
Khamoshi Ka Shor 1 by BSEB - Sufi-Pop music cover art

Khamoshi Ka Shor 1

Sufi-Pop

0:003:32
Lyrics
Description
(Intro - Soft guitar + ambient pads)
रातें भी अब खामोश हैं,
चाँद भी तुझसे पूछता है...
कहाँ गया वो उजाला,
जो तेरी आँखों में बसा था...
---
(Verse 1)
तेरे बिना जो लम्हा जिया,
वो लम्हा, लम्हा एक सज़ा था,
हर सासें तुझको ढूँढती हैं,
जैसे तू ही मेरी दुआ था。
---
(Hook / Refrain)
दिल रुक जा ज़रा,
फिर किसी दर्द से मिलने चला है तू...
रूह थम जा ज़रा,
फिर मोहब्बत में डूबने चला है तू...
तेरा असर अब भी बाकी है,
जैसे तू आज भी यहीं कहीं है...
---
(Verse 2)
हर ख्वाब अब अधूरा सा है,
हर बात में तेरा नाम आता है,
छूटा नहीं तेरा साथ अब तक,
ये दिल खुद से भी झूठ कह जाता है।
---
(Bridge - Vocal build-up)
जो ख़ामोशी तूने दी थी,
वो आज भी शोर करती है,
मैं चलता हूँ मगर रुका हूँ,
क्योंकि तेरी यादें नहीं चलतीं...
---
(Hook - Final Chorus)
दिल संभल जा ज़रा,
फिर मोहब्बत करने चला है तू...
तू टूटा है मगर,
अब भी उससे जुड़ने चला है तू...
तेरा असर अब भी बाकी है,
शायद मोहब्बत मुकम्मल नहीं होती...
---
(Outro - Soft flute & fading hum)
तेरी आवाज़ जैसे हवा में घुली हो,
तेरे बिना भी जैसे तू मुझमें जिंदा हो...