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Kalyug Ka Manav 2 by Pratibha

SongGPT
Kalyug Ka Manav 2 by Pratibha - Traditional Fusion,both vocals music cover art

Kalyug Ka Manav 2

Traditional Fusion,both vocals

0:003:07
Lyrics
Description
(अंतरा 1)
कहते हैं मनव जीवन अनमोल,
पर कalyug में खो चुका है वो रोल।
हर दिनाव बन गया है अंधा,
सच से भागे, झूठ से बंधा।
(कोरस)
ये कalyug का मनव क्यों इतना खो गया?
मंदिर के द्वार पे भी अब डर बो गया।
पशु प्रेमी बना, पर मानव को भूला,
हर पग पे पापी, अब खुद को ना तौला।
(अंतरा 2)
मंदिर की घंटियाँ भी चुप हैं आजकल,
हर दिल में जलता है स्वार्थ का पल।
पशु से भी बढ़कर दया चाहिए थी,
पर इंसान की फितरत ही बदल गई थी।
(कोरस)
ये कalyug का मनव क्यों इतना खो गया?
मंदिर के द्वार पे भी अब डर बो गया।
पशु प्रेमी बना, पर मानव को भूला,
हर पग पे पापी, अब खुद को ना तौला।
(ब्रिज)
कहीं कोई दीपक अभी भी जलता है,
किसी पाशु प्रेमी के मन में पलता है।
वो ही देगा इस अंधेरे को जवाब,
जागो मनव, छोड़ो पाप का ख्वाब।
(अंतिम पंक्तियाँ)
जब तक दिनाव बनेंगे हम सब चुप,
तब तक ये धरती रहेगी अशांत और धुप।
चलो फिर से जगाएं वो करुणा की लौ,
मानवता की राह पे रखें हम पावन पग