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Kahan Ho Piya 1 by An

SongGPT
Kahan Ho Piya 1 by An - Soul,both vocals music cover art

Kahan Ho Piya 1

Soul,both vocals

0:003:26
Lyrics
Description
बचपन से आपको ढूँढती आई हूँ,
हर मोड़ पे बस तसवीर बनाई हूँ।
दीवानी सी गलियों में फिरती रही,
हर शख़्स में साया तेरा ही दिखाई हूँ。
(अंतरा 2)
कभी ख़्वाबों में तशरीफ़ लाए थे आप,
दिल ने फिर से उठाया था इश्क़ का हिसाब।
जोश-ओ-जुनून से हर रास्ता छाना,
मगर हक़ीक़त में ना मिला तेरा जवाब。
(कोरस)
कहाँ हो पिया, क्यों ना आए अभी तक?
ये आँखें राहों में आज भी ठहरी हैं।
दिल रोज़ बुनता है मिलन के फसाने,
पर तन्हाइयाँ आज भी गहरी हैं।
(अंतरा 3)
कब तक पिलाऊँ विरह की ये कड़वी घूंट,
कब आएगा वो लम्हा, कब होगा सुकून?
लोग कहते हैं — ये इश्क़ पागल कर देगा,
पर मेरा सब्र एक रोज़ जान ले लेगा।
(ब्रिज)
हर पल उम्मीदों का दिया जलाए बैठी हूँ,
तेरे नाम की माला जपते-जपते सोई हूँ।
तू आएगा — इसी यक़ीन में जी रही हूँ,
वरना इस इंतज़ार में सब कुछ खोई हूँ।
(कोरस दोहराव)
कहाँ हो पिया, बताओ ना सच्चाई,
क्या मेरा प्यार बस एक रुसवाई?
आ जाओ अब इस प्यास को बुझा दो,
मिलन के उस पल से मुझे सजा दो।