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Ek Hi Dost Ka Dard (House-Rap) 2 by Sumit

SongGPT
Ek Hi Dost Ka Dard (House-Rap) 2 by Sumit - House-Rap (Hindi House With Rap),Male (Versatile)  music cover art

Ek Hi Dost Ka Dard (House-Rap) 2

House-Rap (Hindi House With Rap),Male (Versatile)

0:002:54
Lyrics
Description
[Intro - Spoken, atmospheric synths]
(soft) एक ही दोस्त... एक ही दर्द।
Breath — ( )
[Verse 1 - Melodic, quiet before the drop]
रातें ठहरतीं हैं, दिल से सवाल करतीं हैं — (breath)
छिपी यादें आँखों से दिल तक चलतीं हैं — (breath)
मैंने दी दोस्ती दिल से, खिलती थी हर ख्वाहिश — (breath)
पर किसी मोड़ पर मिल गया वो सन्नाटा, वो परछाई, वो फासिल।
[Pre-Chorus - rising synths]
हमने हँसकर आँसू छुपाए, चेहरे पे मास्क रखा — (breath)
भीड़ में मैं मुस्कुराया, पर अंदर से टूटता रहा।
Hook line incoming — छोटा, पकड़ने वाला:
एक ही दोस्त का दर्द — (repeat) एक ही दोस्त का दर्द — (breath)
[Chorus - House hook, 120-124 BPM, repeatable]
एक ही दोस्त का दर्द, (x2)
रातों में आवाज़ मेरे दिल की — (x2)
एक ही दोस्त का दर्द, (x2)
[Anchor Verse - User (VERBATIM)]
तन्हा चलने लगा हूँ कितने दिनों के बाद,
खामोश राहों ने फिर पूछा मेरा हाल,
जिसे अपना समझा था उम्र भर के लिए,
वही छोड़ गया मुझे, देकर बस यादों का जाल।
हर रात आँखों से नींद रूठ जाती है,
तेरी तस्वीर ही तकिये से बातें करती है,
दुनिया कहती है सब ठीक है मेरे साथ,
पर मेरे दिल को मेरी तन्हाई ही समझती है।
हम हँसते रहे सबको दिखाने के लिए,
अंदर से हर रोज़ टूटते चले गए,
तेरी एक झलक की आदत ऐसी लगी,
कि तुझसे दूर होकर भी तुझमें ही रह गए।
तेरे वादों की गूंज अब भी कानों में है,
तेरे जाने का दर्द हर सांस में है,
हमने मांगा नहीं कुछ खुदा से कभी,
बस तू ही थी जो आज भी अधूरी ख्वाहिश में है।
रातों ने सिखाया है रोना क्या होता है,
खामोशी ने बताया है खोना क्या होता है,
जिसे दिल से चाहो और