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Echoes of Ancient Stones 1 by Mann

SongGPT
Echoes of Ancient Stones 1 by Mann - Poetry Rock,both vocals music cover art

Echoes of Ancient Stones 1

Poetry Rock,both vocals

0:003:01
Lyrics
Description
तेरह सौ साल की पुरानी मिट्टी मुझे बुला करके
मर्तड के मन्दिर में मैं आया शीश नवा करके
मैंने देखा क्या बोलूँ, अब बोला नहीं मुझे जाता
विध्वंसित, खंडित मूरत पर दो आँसू टपका करके
वहाँ फ़िज़ाओं में मैंने सूंघा था गुग्गल चंदन को
हवन कुंड को, दीप धूप को और पुष्प के गुन्छन को
कैसी गंध बसी मन में, मैं क्या बतलाऊँ क्या बोलूँ
सड़ती लाशों की बदबू भी सदा खले अंतर्मन को
प्राचीरों पर शिला लेख में, चीखें लिखी दिखाती हैं
जहाँ ध्वजा आरोहित होती अब चीले मंडराती हैं
टूटी हुई शिलाओं से सुनकर आया मैं क्या बोलूं
रातों में सन्नाटे मे ये रोज़ यहाँ चिल्लाती हैं
कभी ललित ने यहाँ शिला को पहली बार रखा होगा
कभी लल्ल ने यही कहीं आ करके काव्य रचा होगा
मन में मैं कितना सोचूँ अब सोचा नहीं मुझे जाता
क्या मन्दिर का कोई दीपक अब भी यहाँ बचा होगा
जिसने स्नान किया पाँचो गव्यों से, मंत्रोच्चारण में
और नहाया शोणित से भक्तों के अपने आंगन में
इसको मैं कितना देखूँ अब देखा नहीं मुझे जाता
कितने दृश्य छुपा बैठा है ये अपने ही दामन में
एक एक पत्थर के, मन को, मैंने छूकर है जाना
पूछ रहे थे मुझसे वे "क्यों हमको न पहचाना? "
मैंने जो महसूस किया, अब वो तुमसे मैं क्या बोलूँ
सदियों का दुख दर्द तुम्हें क्यों लगता है ये अफसाना