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Divine Awakening 1 by K

SongGPT
Divine Awakening 1 by K - Folk-Fusion music cover art

Divine Awakening 1

Folk-Fusion

0:003:31
Lyrics
Description
(verse)
धरा सृजति, या वराह रूपं,
आकाशे गर्जितं, शक्तिमय प्रकाशं।
एकत्वे प्रवाहितं, जीवन संचार।
शक्तिसमुद्र, जलधर के समांतर।
(chorus)
हे देवता, अवतरित हो,
प्रकृति की पुकार सुनो!
उर्ध्व गामिनी, शक्ति की प्राथना,
संगीत के संग, बहे यह ताना।
(verse)
चैतन्य संचार में, बहे भव्य ध्वनि,
नादस्वर में गूंजे, भूमि की गूढ़ कहानी।
म्रिदंगम की थाप पर, दौड़ते पग,
मोक्ष के खेल में, घेर कर ले चलोगे।
(pre-chorus)
वेदों के स्वर लहराते, अंधियारे में चमकते,
धाराओं के संग बहते, क्रमिकता से बढ़ते।
(chorus)
हे देवता, अवतरित हो,
प्रकृति की पुकार सुनो!
उर्ध्व गामिनी, शक्ति की प्राथना,
संगीत के संग, बहे यह ताना।
(bridge)
आत्मा का स्वतंत्र गान, तांडव करती धरा,
विपुल पर्वतों के बीच, झरनों की कहर।
नादस्वर और थविल की सांधी चक्री,
संरचना बनती सुर माला की कड़ी!
(finale)
शिवाय नमः, ईश्वर की जयजयकार,
सभी मतों का संगम, हम सब एक परिवार।
हर दर्पण में प्रतीक है, मिलती जो रश्मि,
उज्ज्वल भविष्य के लिए, खुले आकाश की काशी।