Create New Playlist

Add a cover pic of your own choice

(Optional)

Name

AI Cover Generator

4 credits

Not enough credits (0/4).

Logout

Are you sure you want to Logout?

Close

Bhakti Ki Dhool 1 by Jagriti

SongGPT
Bhakti Ki Dhool 1 by Jagriti - Folk,both vocals music cover art

Bhakti Ki Dhool 1

Folk,both vocals

0:003:51
Lyrics
Description
नीलाचल के स्वामी, तुम्हारे चरणों में सारा जग नतमस्तक है।
तुम्हारी दृष्टि में अनंत ब्रह्मांड की असीम शांति बसी है।
शंख की गूँज में तुम्हारा नाम स्वर्ग तक पहुँचता है।
मृदंग की थाप में भक्तों का हृदय तुम्हारी धुन पर धड़कता है।
पुरी के तट पर लहरें तुम्हारे दर्शन को व्याकुल हैं।
उनकी हर फेनिल लहर तुम्हारी आरती उतारती है।
तुम्हारे विशाल नेत्रों में सूर्य, चंद्र और नक्षत्र बसे हैं।
तुम्हारे पीताम्बर में दिन का उजास और रात्रि की शीतलता छिपी है।
रथयात्रा के दिन तुम्हारे रथ के पहिए धर्म का चक्र बन जाते हैं।
हर सड़क, हर आँगन, तुम्हारे आशीर्वाद से पवित्र हो जाता है।
बलभद्र का सामर्थ्य और सुभद्रा का स्नेह तुम्हारे साथ चलता है।
तीनों का एक साथ होना भक्तों के लिए परम आनंद का पर्व बनता है।
महाप्रसाद में केवल अन्न नहीं, ईश्वर का प्रेम घुला है।
एक कण भी आत्मा को तृप्त कर देता है और मन को शांति देता है।
तुम्हारे चरणों की धूल पापों को जल की तरह धो देती है।
उसमें जन्म-जन्मांतर के बंधन टूटकर हवा में विलीन हो जाते हैं।
गगन से बरसते बादल भी तुम्हें प्रणाम करते हैं।
सूरज की किरणें तुम्हारे रथ को स्वर्णिम बना देती हैं।
तुम्हारे नाम का स्मरण ही जीवन का सबसे बड़ा वरदान है।
यह स्मरण मृत्यु के भय को भी दूर कर देता है।
तुम्हारा चक्र समय का भी स्वामी है,
जो धर्म को सदा आगे बढ़ाता है और अधर्म का ना