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Babuji Ke Pagdiya 2 by Ankit

SongGPT
Babuji Ke Pagdiya 2 by Ankit - Modern Bhojpuri Romantic Pop,Male Vocals music cover art

Babuji Ke Pagdiya 2

Modern Bhojpuri Romantic Pop,Male Vocals

0:002:49
Lyrics
Description
(मुखड़ा)
कांधे पे जिनगी के बोझा, माथे पे चिंता के रेख।
हमके निभावल बा अब, बाबूजी के पगड़िया के टेक।
हाँ, हमके निभावल बा अब, बाबूजी के पगड़िया के टेक।
(अंतरा 1)
घाम में जरत रहले, जाड़ा में ठिठुरत रहले देह।
खेतवा में खून-पसीना, हमरा खातिर कइले नेह।
उनकर अँगुरी घिस गइल, हमार जिनगी बनावे में,
अब हमार बारी बा, घर के करजा चुकावे में।
(मुखड़ा)
कांधे पे जिनगी के बोझा, माथे पे चिंता के रेख।
हमके निभावल बा अब, बाबूजी के पगड़िया के टेक।
(अंतरा 2)
माई के दवई-बिरो, बहिनी के हाथ पियर करेके बा।
घर के इज्जत-आबरू, गाँव में ऊँच करेके बा।
छोट भाई के पढ़ाई, हर सपना साकार करेके बा,
हर एक फरज के आपन, हँस के स्वीकार करेके बा।
(ब्रिज)
हे भगवन, दीहऽ अतना बल हमके, झुके ना हमार माथ।
धरम-करम के रस्ता पर, छोड़ीहऽ ना कहियो साथ।
लाज रहे हमरा हाथे, बाबूजी के नाम के।
(मुखड़ा)
कांधे पे जिनगी के बोझा, माथे पे चिंता के रेख।
हमके निभावल बा अब, बाबूजी के पगड़िया के टेक।
हाँ, हमके निभावल बा अब, बाबूजी के पगड़िया के टेक.