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Aham Brahmasmi Tat Tvam Asi 2 by Prasad

SongGPT
Aham Brahmasmi Tat Tvam Asi 2 by Prasad - World Music,Male vocals music cover art

Aham Brahmasmi Tat Tvam Asi 2

World Music,Male vocals

0:003:31
Lyrics
Description
(Verse 1)
सुबह की धुंध में जब
सन्नाटा छाया हो
पुराने मंत्र की आवाज़
दिल में समाया हो
अहम् ब्रह्मास्मि मैं हूँ वही
जो सबमें बसा है
तत् त्वम् असि तू भी वही
यही तो राज़ है
(Chorus)
हम हैं सागर, हम हैं लहर
हम हैं खोजी, हम हैं खबर
जो चेहरे हमने ओढ़ रखे
उनके पीछे एक ही नूर छुपा रखा है
अहम् ब्रह्मास्मि तत् त्वम् असि
यही वो मंत्र है जो मुक्त कराए
(Verse 2)
तेरी आँखों में मैं दिखूँ
मेरे दिल में तू बसा
जो अलग लगता था मुझसे
वो भी मेरा ही हिस्सा
बूँद-बूँद मिल जाती है
सागर की गोद में
जो अनेक लगता था
वो एक ही छोद में
(Chorus)
हम हैं सागर, हम हैं लहर
हम हैं खोजी, हम हैं खबर
जो चेहरे हमने ओढ़ रखे
उनके पीछे एक ही नूर छुपा रखा है
अहम् ब्रह्मास्मि तत् त्वम् असि
यही वो मंत्र है जो मुक्त कराए
(Bridge)
साँस लेते "मैं हूँ" कहो
साँस छोड़ते "तू है" कहो
दीवारें गिरती जाएं
फासले मिटती जाएं
जो सच सदा से था यहाँ
आँखों के सामने ही
हम हैं अंधेरे
हम हैं उजाले
(Final Chorus)
हम हैं सागर, हम हैं लहर
हम हैं खोजी, हम हैं खबर
जो कहानियाँ हमने बुनीं
उनके पार एक ही सूर सुनी है
अहम् ब्रह्मास्मि तत् त्वम् असि
पुराना गीत जो आज़ाद कराए
अहम् ब्रह्मास्मि तत् त्वम् असि
छुपा हुआ सत्य तेरे मेरे लिए
(Outro)
(धीमे से, प्रार्थना की तरह)
अहम् ब्रह्मास्मि... तत् त्वम् असि...
मैं वो हूँ... तू वो है...
हम एक हैं...