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हाथों से सरक गया by Nitin

SongGPT
हाथों से सरक गया by Nitin - ballad music cover art

हाथों से सरक गया

ballad

0:003:13
Lyrics
Description
इंद्रो मुखड़ा शुरू में बोला मैंने कुछ, पर सुना तुमने कुछ और ही, लव्ज वही थे, पर मानी बदलते रहे,
सच तो वही था, जो आँखों से बह गया। मुखड़ा तेरा नाम लिया नहीं… पर हर दुआ में तू ही था, जो खोया नहीं कभी… पर हाथों से सरक गया।
अंतरा
राहे मिली थी ऐसे, जैसे मुकड़र की लिखी हो, मैंने सुचा सफर लंबा है, तुमने समझा बस अभी हो…
कहने को हसी बाती थी हमने, पर आँसु ही गवा बने, सवाल खड़े थे खामोशी में जवाबों के साए तले…
मुकड़ा तेरा नाम लिया नहीं, पर हर दूआ में तू ही था, जो खोया नहीं कभी, पर हाथों से सरक गया।
अंतरा, अंतरा अंतरा,
कल्तिया दोनों की थी शाय्द, पर इलजाम एक तरफ लगे, भिड में भी अकेला रहना ये हुनर हमी से सीखे…
तूने कहा था सफर आसान है, मैंने माना सफर भारी, पर बोज उठाते उठाते दिल ठक गया बेचारी,
ये किसा भी अजीब है, सीधा भी उलजा भी, जो समझे वो भी रो दे, जो सुने वो भी हस दे, अंतर मुकरा,
तेरा नाम लिया नहीं, पर हर दूआ में तू ही था, जो खोया नहीं कभी, पर हाथों से,