Create New Playlist

Add a cover pic of your own choice

(Optional)

Name

AI Cover Generator

4 credits

Not enough credits (0/4).

Logout

Are you sure you want to Logout?

Close

स्वाभिमान की अग्नि - सीता की कथा 2 by Sudha

SongGPT
स्वाभिमान की अग्नि - सीता की कथा 2 by Sudha - Indian Folk,Female Vocals music cover art

स्वाभिमान की अग्नि - सीता की कथा 2

Indian Folk,Female Vocals

0:003:59
Lyrics
Description
(अंतरा 1)
सौम्य समर्पित शक्ति स्वरूपा,
पतिव्रता, अर्पित परिणीता।
राजा राम की कोमल वामांगित्रीया,
भूमिजा सीता, हृदय की मीत।
(अंतरा 2)
बाल्मीकि आश्रम के शांत साये में,
तरुवर की छाँव में दिन बीते,
कौन घड़ी में जन्मी मैं, कौन घड़ी में स्वयंवर,
भाग्य के लेखा-जोखा में डूबी सीता।
(कोरस)
स्वाभिमान मेरी अग्नि है,
अग्नि परीक्षा ने किया प्रामाणित।
पर क्यों छोड़ा रघुराई ने,
जब विश्वास मेरा था दृढ़ और अनमोल।
(अंतरा 3)
वनवास की कठोर राहों में,
कंटक शैय्या पर मुस्कुराई,
लव-कुश के संस्कार सँवारे,
नारी का सम्मान जग में दिखलाया।
(अंतरा 4)
रघुवर के संग निभाए वचन,
परित्यक्ता सीता ने सहा तिरस्कार,
मन में उमड़ी पीड़ा गहरी,
फिर भी न डिगी नारी की शान।
(ब्रिज)
नेत्रों से झरते आंसू जैसे जलप्रपात,
हृदय में टीस, मन में विरह का सागर।
हनुमान ने समझाया, बाल्मीकि के आश्रम में,
धैर्य रखा, स्नेह से बढ़ाया पुत्रों का मान।
(कोरस)
स्वाभिमान मेरी अग्नि है,
अग्नि परीक्षा ने किया प्रामाणित।
पर क्यों छोड़ा रघुराई ने,
जब विश्वास मेरा था दृढ़ और अनमोल।
(अंतरा 5)
राम आए आश्रम में, सीता ने बाण चलाए,
विरह की वो घड़ी, हृदय हतप्रभ हुआ।
धरती ने लिया आलिंगन, सीता को समेटा,
नारी का सम्मान, हर पीड़ा से बड़ा।
(अंतरा 6)
लव-कुश बने संस्कार के दीपक,
माँ की शक्ति से भरपूर मन में संयम।
राम राज्य बढ़ा, पर सीता की कथा,
हर नारी के हृदय में आज भी जगी।
(आउ