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स्वप्न है अखंड भारत 2 by Mahendra

SongGPT
स्वप्न है अखंड भारत 2 by Mahendra - Patriotic,both vocals music cover art

स्वप्न है अखंड भारत 2

Patriotic,both vocals

0:003:38
Lyrics
Description
(मुखड़ा)
स्वप्न है अखंड भारत, गर्जे जन–मन से,
Subrat की वाणी बोले, धधके वंदन से।
जहाँ सूरज भी रुके, ऐसी थी ये धरती,
सोने की चिड़िया थी, अब जागे वीर शक्ति。
(अंतरा 1)
सिंधु से सरयू, काबुल से कन्याकुमारी,
हर कोने में थी भारत माँ की जय–जयकारी।
गांधी, पटेल, विवेकानंद का जो था सपना,
Subrat के गीतों में फिर से वो जागे अपना。
(अंतरा 2)
वीर शिवाजी की हुंकार, लक्ष्मीबाई की तलवार,
बिरत्व वही, आत्मा वही, बस बँट गया आकार।
अब न कोई सीमा हो, न दीवारों की लकीर,
बस एक भारत हो – अखंड, स्वर्ण और गंभीर。
(ब्रिज – भावपूर्ण स्वर में)
यह ना केवल इतिहास है, यह तो है भविष्य की पुकार,
जहाँ धर्म, शौर्य और प्रेम हो अपार।
Subrat का है संकल्प यही,
“अखंड भारत” हो फिर खड़ा, ये शपथ ली सभी ने अभी।
(मुखड़ा दोहराव)
स्वप्न है अखंड भारत, गर्जे जन–मन से,
Subrat की वाणी बोले, धधके वंदन से।
जहाँ सूरज भी रुके, ऐसी थी ये धरती,
सोने की चिड़िया थी, अब जागे वीर शक्ति。
(अंतिम पंक्तियाँ – शपथ)
आओ फिर से दीप जलाएँ, एकता का गीत गायें,
हाथ में हाथ लेकर भारत को अखंड बनाएँ।
Subrat के सुरों में, जोश है पुरातन सा,
चलो उठे भारत – स्वर्णिम और अखंड भारत सा।