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सुकून की छाँव 2 by Vishal

SongGPT
सुकून की छाँव 2 by Vishal - बॉलड music cover art

सुकून की छाँव 2

बॉलड

0:003:43
Lyrics
Description
(धीमी, सुकून भरी धुन)
तेरी आंचल की छाँव में बचपन बीता था,
हँसी तेरी गूँजती थी हर उस खाली रात में।
जब तूने थामा था हाथ मेरा, दुनिया लगती थी आसान,
तेरी आँखों की रौशनी थी मेरा विश्वास, मेरी पहचान。
(पूर्व-सुर (Pre-Chorus))
तेरी नज़र बिन लगता है कुछ भी अधूरा,
तेरे बिना हर ख़ुशी लगती है जरा।
(मुखड़ा (Chorus))
ओ माँ, तू ही है मेरी धड़कन में कहीं,
तेरे बिना हर लम्हा लगे वीरान कहीं।
ओ माँ, तू ही है ज़िंदगी की राह में,
तेरे आँचल में ही खुद को पाऊँ हर बाधा में।
(अंतरा 2)
तेरी लोरियों की तान सुन, मन बहलता था,
तेरी बातों में था प्यार, हर दर्द हलका होता था।
तेरी बातें याद आती हैं जब दूर होती है धड़कन,
तेरे आंचल की महक से महकता है मेरा जहां।
(पूर्व-सुर (Pre‑Chorus 2))
तेरी छुअन बिन लगता है सब कुछ सुना-सुना,
तेरे साथ बिन हर सफ़र है रहस्यमय-सा।
(मुखड़ा (दोहराएं))
ओ माँ, तू ही है मेरी धड़कन में कहीं,
तेरे बिना हर लम्हा लगे वीरान कहीं…
(ब्रिज (Bridge))
जब तू पास होती थी, वक्त भी थमा था,
हर दर्द तूने सहा, हर दर्द मुझसे छिपा था।
बिना तेरे चैन कहाँ, तू मेरा सुकून कहां,
ओ माँ, तेरे बिना सब कुछ तो है पूरान।
(फाइनल मुखड़ा + विस्तार)
ओ माँ, तू ही है मेरी धड़कन में कहीं,
तेरे बिना हर लम्हा लगे वीरान कहीं।
तेरी यादों में जी रहा हूँ मैं आज यहाँ,
तेरी ममता की छाँव में पाऊँ सुकून हर राह में।