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सुईली — शामों की आवाज़ 1 by Cecilia

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सुईली — शामों की आवाज़ 1 by Cecilia - Hindi Folk-Pop,Female Vocals music cover art

सुईली — शामों की आवाज़ 1

Hindi Folk-Pop,Female Vocals

0:003:49
Lyrics
Description
[Intro]
सुईली की छोटी आवाज़, धूप में खिंची सी गाय
एक सूई, एक धागा — दिलों में जुगनू जलाए
(गायन धीरे, सरगम में खोलते हुए)
[Verse 1]
सुबह के बाजार में मसालों की खुशबू, थैले और गलियाँ
सुईली हँस कर बोली—"अरे ले लो, ये गीत तुम्हारे लिए भी है"
उसने लाल धागा बांधा एक बच्चे की कलाई पर—हाथ में चाय की कटोरी
नाम सुईली, कोई औज़ार नहीं; एक लड़की, एक गीत, जो टूटे रिश्ते जोड़ती
[Pre-Chorus]
धीरे-धीरे उसकी हँसी में गहरे पुराने शहर के पन्ने खुलते
उसकी सिसकी में भी कोई पैग़ाम, जैसे किसी ने रात का तारा बाँधा
[Chorus]
सुईली, सुईली, तूने जख्म मेरे सिल दिए
सुईली, सुईली, तेरे सुरों से सब हल्का हुआ
(खुला हुक: एक सादे, पकड़े जाने वाला वाक्य—"तूने जख्म मेरे सिल दिए")
[Verse 2 — vivid scenes]
रात को लालटेन के नीचे, चूड़ी की खनक और पतले-से बैजन
रेलवे स्टेशन की भीड़ में उसने एक खोया हुआ खत अपने जाले में लगाया
छत पर मोमबत्ती जली, बच्चे खिड़की से देखते—सुईली गुनगुनाई, लबों पे छोटा गीत
उसकी उंगलियाँ धागा कसतीं, जैसे किसी ने सुबह की रेखा फिर खींच दी हो
[Pre-Chorus]
कभी उसकी आवाज़ में बारिश की गंध आ जाती, कभी रोटी की ताज़गी
उसका नाम जब बोला जाता, शहर के किनारे भी अपना घर मिल जाता
[Chorus — Variation / add harmony line]
सुईली, सुईली, तूने जख्म मेरे सिल दिए (दो-आवाज़ harmony: ओह-आह)
सुईली, सुईली, तेरी खामोशी भी अब गीत बन गई
(यहाँ बैकिंग वोकल्स ऊंचा ले—दूसरी लाइन में अंदरूनी हारमनी)
[Bridge — emotional payoff]
याद है, उस