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सिर्सिया की पुकार 2 by deepak

SongGPT
सिर्सिया की पुकार 2 by deepak - Fusion Folk With Clear Bhojpuri Male Vocals,Male V music cover art

सिर्सिया की पुकार 2

Fusion Folk With Clear Bhojpuri Male Vocals,Male V

0:002:42
Lyrics
Description
[Verse 1]
बूँद - बूँद जहाँ हमार बिरगंज,
आपन जियरा के हियारा बुझावत रहे ||
रानीघाट किनारे साँस लेत सपना,
कठस - कठिन आपन समैया चुपचाप धुवावत रहे ||
[Pre-Chorus]
हाँस भिन्न पशु-पन्छी खेले हरस में,
पनीया में बंशी मछली के लोभावत रहे ||
बिरगंज के माटी बोले नीर के भाषा,
हर बूँद जीवन के पाठ सिखावत रहे ||
[Chorus]
नेपाल-भारत के बीच बहत ई धारा,
सरहद से ऊपर रिश्ता सिखावत रहे ||
भोर में लोग उतरें घाट पर डुबकी लगावत,
ठंडा बहत पनीया तन-मन के पवितर बनावत रहे ||
[Verse 2]
सूरज के सुनहरा किरन छुप-छुप के मुस्कावत,
पखेरू गीत गावत, फूल-फूल रंग लहरावत रहे ||
हँसते बच्चे खेलत पानी में डुबकी,
मन भर पानी में पौडी लगावत रहे ||
[Bridge]
घंटा-घड़ियाल, पूजा के सुर गूँजत,
पानी मन के मैल बहावत रहे ||
आज उहे सिर्सिया काला जहर बन गइल,
हर साँस में खामोशी समागइल ||
[Final Chorus]
हे सिर्सिया, फिर से निर्मल बन के आव,
बिरगंज तहर रास्ता निहारत रहे ||
नेपाल-भारत के बीच बहत ई धारा,
सरहद से ऊपर रिश्ता सिखावत रहे ||