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सती की चिता, महादेव का क्रंदन 2 by Jay

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सती की चिता, महादेव का क्रंदन 2 by Jay - भक्ति music cover art

सती की चिता, महादेव का क्रंदन 2

भक्ति

0:003:54
Lyrics
Description
Intro (धीमे तानपूरा के साथ)
आग में लिपटी थी प्रीत मेरी,
धुएं में उड़ गई भाग्य रेखा...
जहाँ था सती, वहाँ अब राख है,
दिल पे चलती हर इक लेखा...
[अंतरा 1]
जला दी खुद को मेरी सती,
तेज थी पर चुप रह गई।
धधकते अग्नि के फूलों में,
प्रीत की चिता सज़ गई।
मैं बस देखता रहा मौन-सा,
ना रोका, ना पुकारा।
पर अंदर टूटा हर अंग मेरा,
कण-कण बिखरा सारा...
[कोरस]
हे सती! क्यों छोड़ गई तू मुझे?
क्यों अग्नि में समा गई तू?
मैं शिव हूँ, पर आज शव-सा,
तेरे बिना कुछ भी ना रहा हूँ...
तेरा जाना सृष्टि का दुःख है,
तेरा दर्द मेरा श्राप बन गया।
अब तांडव करूँ या रो लूँ मैं?
प्रेम ही तो यह पाप बन गया...
[अंतरा 2]
स्मृति में तेरे हर पल अब,
त्रिनेत्र से आँसू बहते हैं।
गंगा भी शांत हो जाती है,
जब मैं शोक में रहते हैं।
ना त्रिशूल उठता हाथों से,
ना डमरू कोई बोले।
तेरे जाने के बाद सती,
सारी दुनिया ही मुझे डोले...
[कोरस]
हे सती! क्यों छोड़ गई तू मुझे?
क्यों अग्नि में समा गई तू?
मैं शिव हूँ, पर आज शव-सा,
तेरे बिना कुछ भी ना रहा हूँ...
[ब्रिज]
ना क्रोध है, ना भस्म है अब,
ना ध्यान में शांति मिलती है।
तेरी यादों की गूंज में,
हर रात अधूरी सिलती है...
[आख़िरी लाइन (धीमे सुरों में)]
जब तक फिर जन्म ले तू सती,
मैं तांडव में खोया रहूँगा...
तेरे बिना ये शिव नहीं कुछ,
बस तेरी यादों में रोया रहूँगा...