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संगम युग की वेला 1 by Rajendra

SongGPT
संगम युग की वेला 1 by Rajendra - Spiritual,both vocals music cover art

संगम युग की वेला 1

Spiritual,both vocals

0:003:25
Lyrics
Description
(अंतरा 1)
शिव शंकर त्रिनेत्र जगावे,
ज्ञान-ज्योति मन में छावे।
अर्धनारीश्वर रूप अनोखा,
राम-कृष्णा आत्मा साक्षा।
पिता के रूप में राम विराजें,
माता कृष्ण चंद्रमा रूप साजें।
रथ चोला प्रजापिता धारी,
कल्याण करे सृष्टि सारी।
धुन:
🔔 संगम युग की वेला आई,
हर आत्मा को राह दिखाई।
सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग,
फिर से वही लीला दोहराई।।
---
(अंतरा 2)
पुरुषोत्तम का संगम बेला,
महाभारत की गूँजे खेळा।
रामायण की गाथा फिर से,
देव-असुर का संग्राम हिरे से।
सत्य की सेना जाग उठी है,
झूठ की दुनिया भाग उठी है।
सतधर्म की विजय निशानी,
शिव का शंखनाद सुहानी।
धुन:
🔔 संगम युग की वेला आई,
हर आत्मा को राह दिखाई।
सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग,
फिर से वही लीला दोहराई।।
---
(अंतरा 3)
रचता फिर से विश्व महान,
ज्ञान अमृत बरसे गगनयान।
प्रजापिता के रथ सवारी,
संग चलें हम नर-नारी।
बाबा के हाथों सृष्टि संवरे,
संगम युग में भव भव तरें।
चलो आत्मा, जागो सब तो,
सतयुग द्वार खड़ा है अब तो।
धुन:
🔔 संगम युग की वेला आई,
हर आत्मा को राह दिखाई।
सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग,
फिर से वही लीला दोहराई।।