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श्री हनुमान की मंद गति की लोरी 2 by Vikash

SongGPT
श्री हनुमान की मंद गति की लोरी 2 by Vikash - Indian,Female vocals music cover art

श्री हनुमान की मंद गति की लोरी 2

Indian,Female vocals

0:003:28
Lyrics
Description
(सॉफ्ट सितार की धुन के साथ धीमी तंपुरा की तान)
(प्रथम अंतरा)
शांत आकाश के नीचे, गूँजती है पुकार,
पवनसुत की महिमा, लहराती हर एक पार।
सुनो, हृदय की गहराई से, निकले ये स्वर,
हनुमान जी के चरणों में, शांति का उदय फिर।
(मृदु बाँसुरी के सुर)
जैसे नदी की मंद धारा, बहती है निश्छल प्रेम,
तेरी भक्ति की छाया में, मिटती हर भीड़ वेदना।
नभ में उड़ता पवनपुत्र, परे अंधकार के,
तेरे चरणों की छाया से, खिल उठे मन के तार।
(ताल की मधुर गूंज, दिल की धड़कन जैसी)
राम नाम की माला जपती, हवा में घुलती मधुरता,
पत्तों की सरसराहट में, गूंजे तेरी महिमा।
(कोरस - मंत्रमुग्ध, जपात्मक)
रामदूत, हनुमत सेवक,
शरण तुम्हारी हम लें।
रामदूत, हनुमत सेवक,
शक्ति हमारी, शांति का संदेश।
(द्वितीय अंतरा)
तुम्हारी भुजाओं में छुपी है, अनंत वीरता की छाया,
शत्रु जो भी आए सामने, मिट जाए उनकी माया।
शांत समंदर सी गहराई, और पहाड़ों सी अटलता,
तेरे चरणों में नतमस्तक, मिलती है आत्मा की शांति।
(संगीत में हल्का उतार-चढ़ाव, भावनाओं की लहर)
पवन के झोंकों में बसी, तेरी अमर गाथा,
हर सांस में बहे श्रद्धा, हर दिल में बहे आशा।
(कोरस - मंत्रमुग्ध, जपात्मक)
रामदूत, हनुमत सेवक,
शरण तुम्हारी हम लें।
रामदूत, हनुमत सेवक,
शक्ति हमारी, शांति का संदेश।
(ब्रिज - सफेद बाँसुरी और सितार का मधुर संवाद)
(अंतिम अंतरा)
मंद गति से बहती, ये लोरी तुम्हारी है,
प्रेम, भक्ति और विश्वास की, अमर