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श्याम की बांसुरी 1 by akshhh

SongGPT
श्याम की बांसुरी 1 by akshhh - folk,male vocals music cover art

श्याम की बांसुरी 1

folk,male vocals

0:003:15
Lyrics
Description
गोकुल का वो समय, जब सूरज ढलने लगता और आकाश सुनहरा हो जाता,
तेरी बांसुरी की पहली तान हवा में तैर जाती,
और उस स्वर के साथ ही यमुना का जल और भी निर्मल हो जाता।
गोपियों के हाथ से दूध की मटकी छूट जाती,
गायों का चरना रुक जाता,
और चारों ओर बस एक ही पुकार सुनाई देती —
“श्याम आ गए!”
तेरे कदमों में जैसे चुम्बक था,
जो हर दिल को खींच लेता था।
गोपियाँ अपने घर की चिंता भूलकर
तेरी धुन के पीछे-पीछे चली आतीं,
जैसे चाँदनी अपने चाँद के बिना अधूरी हो।
तेरी आँखों में वो गहराई थी
जिसमें डूबकर हर गम भुलाया जा सकता था।
तेरी मुस्कान में वो अपनापन था
जो सबसे रूठे हुए मन को भी मना ले।
यमुना किनारे की वो रासलीला,
जहाँ आकाश में चाँद ठहर गया था,
तारे झिलमिलाते हुए नीचे झुक आए थे,
और वृंदावन के पेड़ अपनी पत्तियों को हिलाकर
तेरे गीत की ताल पकड़ रहे थे।
हर गोपी को लगता,
तू सिर्फ़ उसके साथ है,
तेरी बांसुरी सिर्फ़ उसी के लिए बज रही है।
ये तेरी लीला थी —
एक में अनेक, और अनेक में एक।
तेरे नृत्य की गति में ब्रह्मांड घूम रहा था,
तेरे पाँव की थाप से धरती गूँज रही थी,
और तेरी बांसुरी से बहते स्वर
जैसे जीवन के सबसे मधुर रहस्य को खोल रहे थे।
वो रात समय से परे थी,
जहाँ ना भोर का भय था,
ना जुदाई का ख्याल।
पर लीला कभी एक जैसी नहीं रहती।
गोकुल और वृंदावन के लिए एक नया अध्याय आने वाला था।
मथुरा का राजा कंस,
जो तेरे जन्म से ही अपने अंत के भय में