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शिव की महिमा 1 by Radhe

SongGPT
शिव की महिमा 1 by Radhe - World Music,both vocals music cover art

शिव की महिमा 1

World Music,both vocals

0:002:57
Lyrics
Description
हे कैलाशपति त्रिपुरारी, नीलकंठ मेरे शिव शंभू,
तुम्हारी जटाओं से बहती गंगा जीवन का अमृत है,
तुम्हारे त्रिनेत्र से फूटती है सत्य की अग्नि,
जो असत्य को भस्म कर दे, जो अंधकार को उजाले में बदल दे।
हे पशुपति नाथ, हर प्राणी में तुम्हारा अंश है,
तुम भस्म से विभूषित, पर भव्यता के अधिपति हो,
ना सोने का मुकुट, ना रत्नों का हार —
बस बाघम्बर और रुद्राक्ष, फिर भी राजाओं के भी राजा हो।
तुम डमरु की ध्वनि में ब्रह्माण्ड का नाद समेटे हो,
तांडव में सृष्टि का संहार, और समाधि में परम शांति हो,
तुमने विषपान कर सारा जगत बचाया,
तुम भोलेनाथ हो, जो बिना बुलाए भी भक्तों पर कृपा बरसाते हो।
हे शिव शंकर, तुम ही आदि हो, तुम ही अनंत,
तुम्हारे बिना कुछ भी नहीं, तुम्हारे साथ सब कुछ सरल,
तुम मुक्ति के द्वार हो, मोक्ष के मार्गदर्शक,
तुम करुणा के सागर हो, और भक्ति के परम लक्ष्य।
हे अघोरेश्वर, तुमने श्मशान को साधना स्थल बनाया,
जहाँ मृत्यु डराती है, वहाँ तुम तप करते हो,
तुमने पार्वती को अर्धांगिनी बनाकर सृष्टि को संतुलन दिया,
तुमने गणेश और कार्तिकेय जैसे पुत्रों से धर्म का विस्तार किया।
तुम न दुराचार को सहते हो, न अधर्म को पलने देते,
तुमने रावण को भी वरदान दिया, पर अहंकार के समय संहार भी किया,
तुम शिवलिंग में समाए अनंत ब्रह्मांड हो,
तुम्हारी पूजा से ही हर युग का कल्याण होता है।
हे महाकाल, तुम समय से परे, जीवन और मृत्यु के साक