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विनोद की अधूरी खुशियाँ 2 by Nishu

SongGPT
विनोद की अधूरी खुशियाँ 2 by Nishu - folk,male vocals music cover art

विनोद की अधूरी खुशियाँ 2

folk,male vocals

0:003:46
Lyrics
Description
[Intro - Instrumental]
(flute + sparse piano, धीरे-धीरे उठते तार)
[Verse 1]
चारपाई पर वो हँसी, मिट्टी की सड़क पर नाम,
सरसो के खेत के किनारे, नहर की ठंडी हवा संग।
शादी के दिन के झुमके, मांग में हल्की लाल रेखा,
पर जब बिल आई घर पर — सुना मैंने 'छह हज़ार' नाम।
उसने देखा तनख्वाह मेरी, आंखों में सरक गए काम,
मुस्कुराहट बदल गई, छोड़ दी उसने हाथ मेरा आराम।
[Chorus]
छह हज़ार, अधूरी खुशियाँ — ओ विनोद, तेरी आरज़ू कहाँ?
छह हज़ार, अधूरी खुशियाँ — ओ विनोद, ओ विनोद (हम्म...)
(बैकिंग: महिलाओं की धीमी 'ओ विनोद…' हुमिंग, सॉफ्ट स्ट्रिंग्स)
[Verse 2]
सरपंच के आँगन में, कदम मेरे बँधे हुए कम,
ज़ी-क्रिम अधिकारी (Z-Cream अधिकारी) कहे — ‘‘फाइलें करो घर पर दम।’’
घास से पटी खपरैल की छाँव में, हाथ मेरे काम के लिए तले,
साथी पीछे से हँसते, बोली बनके मेरे नाम पर पाले।
चार बातें छोटी-छोटी, मेरी एतराज़ न सुनी गयी,
मिट्टी की उस सोंधी खुशबू में, हर दुआ नजर कर भी गई।
[Chorus]
छह हज़ार, अधूरी खुशियाँ — ओ विनोद, तेरी आरज़ू कहाँ?
छह हज़ार, अधूरी खुशियाँ — ओ विनोद, ओ विनोद (हम्म...)
(चोरी-कमी: टेबल की धीमी तबला लय, गिटार आर्केस्ट्रेशन नरम)
[Bridge]
याद है वो वादा, चूड़े की खनक, वरमाला के गीत बोले थे,
उसने कहा था — हम साथ चलेंगे, खेत में भी चाँदनी बिखरेगी।
अब बस वो याद है, सिंदूरी धब्बा, और फुरसत के खंडर।
[Verse 3 - Build]
पर मैं जुर्म नहीं मानता, दिल में आशा की लौ जली,
चारपाई पर बैठ कर भी, मैं अपने कल को दुबारा मापे।
दिन आएग