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वर्दी का हक 1 by SHREYANSH

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वर्दी का हक 1 by SHREYANSH - Inspirational Hindi Patriotic music cover art

वर्दी का हक 1

Inspirational Hindi Patriotic

0:003:03
Lyrics
Description

[Verse 1] धूप की किरणें जब सीधी छूती हैं, सड़क के कोनों में वैराग छुपा होता है, घुटनों की खरोंच, सूरज की तपिश में भी ये लोग खड़े रहते हैं। कागज़ की खबरों में कभी नाम नहीं, दिल की कड़क सच्चाई को नहीं दिखाते, हर ड्यूटी की शुरुआत, धुंध के भीतर भी उनका कदम आवाज़ करता है। [Pre-Chorus] मोहल्लों की गलियों से लेकर चौक की चौखट तक, टूटते जंजीरों जैसी उम्मीदों के बीच, बिना शिकायत के ये चलते रहते हैं। [Chorus] ये वर्दी का हक है, वो आवाज़ जो ठहरती नहीं, होमगार्ड्स की मेहनत का हक़, जो वक्त के साथ दमकती नहीं। ना हो कोई ठेस, ना नीचा दिखाने वाला वार हो, सरकार को बस एक पैग़ाम देना है, स्थायी अधिकार हो। 🇮🇳 [Verse 2] बचपन की हँसी से दूर, घर के उस कोने में तन्हा सफर, बीती शामों की रौशनी में, बच्चों की निगाहों में चिंता का असर। रोटी की रेखा बनती छत पर, उम्मीदों की बूंदें थम गईं, पर दिल में एक वादा है, ये सफर कभी अधूरा नहीं। [Pre-Chorus] उनके कदम कहीं रुक जाएंगे नहीं, उनकी महफिल भी रुकी नहीं, होंठों पे जज़्बा, आँखों में अरमान, पहचान पाने का इंतजार भी कदम थमा नहीं। [Chorus] ये वर्दी का हक है, वो आवाज़ जो ठहरती नहीं, होमगार्ड्स की मेहनत का हक़, जो वक्त के साथ दमकती नहीं। वो इज्जत जो हर दिन बढ़े, जो नामों के साथ साथ आ जाये, हर थका हारा हाथ जो थामे, उसका भी मान बने। 🇮🇳 [Bridge] सुनसान गलियों की परछाई में छुपे अजीब अफसाने, कदमों की थकान कहती कहानी जहां उम्मीदें सजाए। परछाई से लम्बा ये सफर, अब रोशनी मांगता है, उनके नाम को गुनगुनाये जहां यूं भीड़ के अलावा कोई जानता है। [Final Chorus] ये वर्दी का हक है, वो आवाज़ जो थम नहीं, होमगार्ड्स को भी मिले वो हक जो बरसों से कहती रही। सरकार से है ये गुज़ारिश, दिल की धड़कन में छुपा आवाज़, हर होमगार्ड को मिले उनका हक आज। 🙏 [Outro] रात के सन्नाटों में, थके पाँव रखते, अज्ञात नामों के उस सफर को, अब पहचानता हर दिल है।