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वक्त ने बदला मुझको by Shiv

SongGPT
वक्त ने बदला मुझको by Shiv - स्लो म्यूजिक music cover art

वक्त ने बदला मुझको

स्लो म्यूजिक

0:002:16
Lyrics
Description

(Intro - स्लो म्यूजिक के साथ) हाँ... सब कहते थे कि वक्त बदलता है, पर यहाँ तो वक्त ने मुझे ही बदल दिया। कोई साथ नहीं, बस ये तन्हाई और मैं... सुन। (Verse 1) कमरे में अंधेरा, और हाथ में ये कलम है, लिखने बैठा हाल अपना, आँखों में ये नम है। वो कहती थी कि साथ देगी उम्र भर मेरा, आज भीड़ में खड़ा हूँ, पर साथ सिर्फ गम है। दिखावा नहीं आता, मैं दिल से बोलता हूँ, ज़ख्म जो पुराने, उन्हें शब्दों में तोलता हूँ। झूठी थी वो बातें, और झूठे थे वो वादे, अब बंद कमरे में मैं अपनी यादें खोलता हूँ। फोन की गैलरी में अब भी तेरी तस्वीर है, पर तू साथ नहीं, शायद खोटी मेरी तक़दीर है। हँसता हूँ महफ़िल में, पर अंदर से मैं राख हूँ, अपनी ही कहानी का मैं बुझा हुआ चिराग हूँ। (Chorus - सुरीली आवाज में) ये कैसी बेबसी है, ये कैसा शोर है, मेरा ही हाथ, पर किसी और की डोर है। खो गया हूँ खुद में, अब जाऊँ मैं कहाँ? सूना है ये दिल, और सूना ये जहाँ। (Verse 2) दुनिया कहती 'मूव ऑन', पर कैसे करूँ यार? यहाँ साँसें भी लेती हैं अब यादों का उधार। दोस्त कहते 'भाई भूल जा', पर भूलूँ मैं कैसे? बिका हुआ था रिश्ता, और जेब में थे पैसे। कामयाबी की दौड़ में मैं इतना आगे आ गया, पीछे मुड़कर देखा तो मेरा साया भी घबरा गया। सब पास हैं मेरे, पर खास कोई नहीं, इस बनावटी दुनिया का अब पास कोई नहीं। नींद नहीं आती अब, बस काली ये रातें हैं, दीवारों से करता मैं अपनी ही बातें हूँ। खुद से हारा हूँ मैं, किसी और से गिला क्या? इतनी वफ़ा की थी, पर बदले में मिला क्या? (Outro) मिला क्या? कुछ भी तो नहीं... बस एक खालीपन। अब ये रैप नहीं, मेरी रूह की चीख है। खैर... छोड़ो।