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लड़का हूँ 2 by Sairaj

SongGPT
लड़का हूँ 2 by Sairaj - Hindi Rap music cover art

लड़का हूँ 2

Hindi Rap

0:002:38
Lyrics
Description
(verse)
लड़का हूँ, ये ताना सुना हज़ार बार,
"मजबूत बन", "मत रो", बस यही उपकार।
घर की उम्मीदें, कंधों पे भार,
पर दिल की सुने कौन? सबको बस विचार।
कभी पापा की तरह चुपचाप सह लिया,
कभी माँ के लिए खुद को बिखेर लिया।
दोस्तों में हँसता, रातों को रोता,
कभी खुद से, कभी किस्मत से खोटा。
(chorus)
लड़का तो हूँ, पर पत्थर नहीं,
जो हर दर्द को चुपचाप सहे वहीं सही।
मेरी भी है चाह, मेरी भी है बात,
पर सबको चाहिए मुझसे बस परछाई की औकात。
(verse 2)
सपने हैं मेरे भी, पर वक़्त नहीं,
जोश भी है सीने में, पर भाग्य नहीं।
लड़का हूँ, तो रोज़ लड़ना है खुद से,
दिखाना नहीं, वरना कहेंगे – "कमज़ोर है अंदर से।"
प्यार किया, पर लौटा कुछ नहीं,
दोस्ती निभाई, पर समझा कुछ नहीं।
जो अंदर है, वो बाहर नहीं ला सकता,
क्योंकि दुनिया कहती है – “लड़का है, हिम्मत रख!”
(bridge)
मैं हँसता हूँ, क्योंकि मेरे आँसू डरते हैं,
कहीं कोई देख न ले, कहीं कोई मुझ पे हँस न दे।
हर दिन एक नया चेहरा पहनता हूँ,
क्योंकि जो मैं सच में हूँ… वो बस मैं जानता हूँ।
(final chorus)
लड़का तो हूँ, पर इंसान भी हूँ,
हर ज़िम्मेदारी में, मैं थक भी जाता हूँ।
बस एक दिन, कोई समझे ये बात,
कि चुप रहने वाला भी… रोता है रात।